औरंगजेब की तारीफ पर जेल की सज़ा राजनीती में मचा घमासान!
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बिहार की राजनीति में इन दिनों इतिहास की गूंज सुनाई दे रही है। देशभर में छिड़ी औरंगजेब की बहस अब बिहार विधानसभा तक पहुंच गई है, जहां AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान ने मुगल शासक को ‘महान’ बताते हुए नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने न केवल औरंगजेब की तारीफ की, बल्कि महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी के निलंबन पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बीजेपी नफरत की राजनीति कर रही है और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।
अख्तरुल ईमान ने पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि औरंगजेब एक महान सम्राट था, जिसने अपनी जीविका टोपियां सिलकर चलाई। उन्होंने दावा किया कि औरंगजेब ने करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल अपनी विलासिता के लिए नहीं किया, बल्कि देश की सेवा की। AIMIM विधायक ने कहा, “उसने भारत को अफगानिस्तान से बर्मा (म्यांमार) तक फैलाया, इसे एकीकृत किया और ‘अखंड भारत’ बनाया। उसने मंदिर और मस्जिद दोनों को समान दृष्टि से देखा।”
लेकिन बिहार में यह बयान यूं ही नहीं आया। हाल ही में जेडीयू के एमएलसी खालिद अनवर ने भी औरंगजेब को ‘अच्छा शासक’ बताया था, जिससे बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया। बीजेपी ने इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी और जेडीयू पर दबाव बढ़ा दिया। बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने खालिद अनवर को सदन से निष्कासित करने की मांग कर दी, जिससे मामला और गरमा गया।
इस पूरे विवाद में AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के पास विकास के नाम पर कुछ नहीं है, इसलिए वह इतिहास के पन्नों को उखाड़कर हिंदू-मुस्लिम राजनीति करने में लगी रहती है। उन्होंने सवाल किया कि बार-बार औरंगजेब की चर्चा छेड़ने का क्या मतलब है? क्या इससे बिहार में बेरोजगारी खत्म हो जाएगी? क्या इससे किसानों की समस्याएं हल हो जाएंगी?
बिहार में औरंगजेब पर छिड़ी इस बहस को लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जहां विपक्ष इसे मुद्दों से भटकाने की साजिश बता रहा है, वहीं बीजेपी इसे ‘कट्टरपंथी मानसिकता’ का प्रमाण मान रही है। पार्टी के नेताओं ने कहा कि जो लोग औरंगजेब को महिमामंडित कर रहे हैं, वे असल में मुगलों के अत्याचारों को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने इसे भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा पर हमला करार दिया।
इतना ही नहीं, इस बयानबाजी का असर अब बिहार विधानसभा के भीतर भी दिखने लगा है। बीजेपी और जेडीयू के बीच इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। जेडीयू के कुछ नेता जहां इस बहस को बेवजह बता रहे हैं, वहीं बीजेपी इसे एक गंभीर मुद्दा मान रही है और अपने सहयोगी दल जेडीयू पर भी इस संबंध में रुख साफ करने का दबाव बना रही है।
इस पूरे विवाद का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि बिहार में यह मामला ऐसे वक्त में गरमाया है जब 2024 लोकसभा चुनाव के बाद अब राज्य की सियासत 2025 के विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस चुनावी गणित को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है। बीजेपी इस मुद्दे को हिंदू वोटरों को साधने के लिए इस्तेमाल कर सकती है, जबकि जेडीयू और अन्य दल इससे किनारा करने की कोशिश कर रहे हैं।
बहरहाल, बिहार की राजनीति में यह नया विवाद कब तक चलता है और इसका असर आगामी चुनावों पर कितना पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी। लेकिन एक बात तय है कि इतिहास की यह लड़ाई आने वाले दिनों में और भी गरमाएगी, क्योंकि अब सियासत की बिसात पर इतिहास के पन्नों से निकले औरंगजेब को मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
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