खटारा गाड़ी या मर्सीडीज़ से बिहार की तुलना ! आखिर क्या है बिहार का भविष्य?

खटारा गाड़ी या मर्सीडीज़ से बिहार की तुलना ! आखिर क्या है बिहार का भविष्य?


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बिहार विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को सत्ता और विपक्ष के बीच तकरार चरम पर पहुंच गई, जब उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर करारा हमला बोला। सम्राट चौधरी ने तेजस्वी को ‘बउआ’ कहते हुए तंज कसा कि उन्हें जो भी लिखकर दिया जाता है, वे बस उसे पढ़ने का काम करते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ में कहा कि 2005 में जब उन्होंने बिहार की कमान संभाली, तब उन्हें एक "खटारा गाड़ी" मिली थी, लेकिन उन्होंने उसे मर्सिडीज में तब्दील कर दिया। बिहार को बीते 20 सालों में उन्होंने लगातार सींचा है और उनके नेतृत्व में राज्य तेजी से विकास के रास्ते पर बढ़ रहा है।  

बजट पर दो दिनों से चली आ रही चर्चा के बाद सरकार की ओर से जवाब देने के लिए सम्राट चौधरी खड़े हुए। उनके भाषण के दौरान विपक्षी विधायकों ने नाराजगी जाहिर की और सदन से वॉकआउट कर दिया। लेकिन इससे सम्राट चौधरी के तेवर और भी तीखे हो गए। उन्होंने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि 34 साल की उम्र में भी वे अनुभवहीन हैं, जबकि 74 साल की उम्र में भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनसे चार गुना अधिक काम कर रहे हैं।  

तेजस्वी यादव और उनके परिवार पर हमला तेज करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि 1990 से 2005 तक बिहार में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार ने कोई ठोस विकास कार्य नहीं किया। उन्होंने विशेष रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि 15 वर्षों के उनके शासनकाल में एक भी नया मेडिकल कॉलेज नहीं खोला गया। जबकि मौजूदा सरकार हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की दिशा में तेजी से काम कर रही है और कई जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू भी हो चुके हैं।  

सम्राट चौधरी ने लालू यादव के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए तंज कसा, ‘‘लालू प्रसाद खुद कहा करते थे कि रानी के पेट से राजा पैदा नहीं होता, लेकिन जब सत्ता का सवाल आया तो उन्होंने खुद ही इस सिद्धांत को तोड़ दिया। पहले रानी (राबड़ी देवी) को सत्ता में बैठाया और अब राजकुमार (तेजस्वी यादव) को मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब पहले जैसी नहीं रही, वह समझ चुकी है कि परिवारवाद की राजनीति राज्य को आगे नहीं ले जा सकती और यही कारण है कि अब इस तरह की राजनीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  

तेजस्वी यादव के क्रिकेट करियर पर चुटकी लेते हुए सम्राट चौधरी ने कहा, ‘‘जब क्रिकेट खेलने गए, तो पूरे करियर में कुल 37 रन ही बना सके। जब क्रिकेट में कोई योगदान नहीं दे पाए, तो राजनीति में क्या कर पाएंगे?’’ उन्होंने कटाक्ष किया कि जो व्यक्ति खेल के मैदान में अपनी पारी ठीक से नहीं खेल सका, वह राजनीति की पिच पर क्या कर पाएगा?  

विधानसभा में इस तीखी बयानबाजी के बाद सदन का माहौल गर्मा गया। विपक्षी विधायकों ने इस हमले को गैर-जरूरी बताते हुए इसे सरकार की नाकामियों से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया। हालांकि, सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर पलटवार जारी रखा।  

इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह साफ हो गया कि बिहार की राजनीति में बयानबाजी का स्तर अब और तल्ख होता जा रहा है। सत्ता पक्ष जहां विकास कार्यों को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है, वहीं विपक्ष इसे केवल राजनीतिक दिखावा करार दे रहा है। लेकिन विधानसभा के भीतर और बाहर जारी इस सियासी जंग के बीच बिहार की जनता असली मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रही है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे इस लड़ाई में कौन सा पक्ष कितना मजबूत साबित होता है।

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