पहलगाम आ/तंकी हला: राजनीति की साजिश या आतंकी साजिश? |
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**पहलगाम आतंकी हमला: राजनीति की साजिश या आतंकी साजिश?**
22 अप्रैल 2025, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुई एक दर्दनाक और खौफनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। धार्मिक पर्यटन पर निकले 26 हिंदू श्रद्धालुओं को सिर्फ उनके धर्म के आधार पर आतंकियों ने गोलियों से भून दिया। इस जघन्य हमले ने न सिर्फ इंसानियत को शर्मसार किया, बल्कि देश की एकता और अखंडता पर भी सीधा हमला किया। अब इस पूरे मामले पर राजनीति भी शुरू हो गई है। आरजेडी प्रवक्ता शक्ति यादव ने इस आतंकी हमले को ‘पहले से लिखी गई स्क्रिप्ट’ करार देते हुए केंद्र सरकार पर परोक्ष रूप से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
**क्या यह राजनीति की सही दिशा है?**
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले के तुरंत बाद बिहार के मधुबनी से सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकियों को कल्पना से भी बड़ी सजा दी जाएगी और देश उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेगा। लेकिन इसी बीच आरजेडी नेता शक्ति यादव ने बयान देते हुए कहा कि इस पूरी घटना से षड्यंत्र की बू आती है, और यह एक प्री-प्लान स्क्रिप्ट जैसा लगता है। उनके इस बयान से राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
**हमला या साजिश—किसके लिए?**
शक्ति यादव के बयान को कई लोग बेहद असंवेदनशील मान रहे हैं। उनका कहना है कि जब देश के नागरिकों की जान गई है, तब ऐसे बयानों से न सिर्फ पीड़ितों का अपमान होता है, बल्कि देश के मनोबल को भी ठेस पहुंचती है। वहीं, शक्ति यादव जैसे नेताओं की दलील है कि हर बार चुनाव से पहले या किसी बड़े राजनीतिक मौके पर इस तरह की घटनाएं सरकार की “संयोग या प्रयोग” की राजनीति का हिस्सा होती हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है—क्या वाकई आतंकी हमलों को लेकर इतनी सस्ती राजनीति होनी चाहिए?
**पहलगाम हमला और उसका दर्द**
इस आतंकी हमले ने देश की आत्मा को हिला दिया है। इस हमले में मारे गए लोगों में से कुछ कन्नड़ भाषी थे, कुछ बंगाली, कुछ गुजराती, और कुछ बिहार के निवासी थे। यानी भारत की विविधता इस हमले का शिकार बनी। इससे साफ है कि आतंकवाद किसी धर्म, भाषा या जाति को नहीं देखता, उसका लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ डर फैलाना होता है।
**राजनीति का समय नहीं**
यह समय पीड़ितों के परिवारों के साथ खड़े होने का है, न कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति करने का। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, इस वक्त देश को एकजुटता की जरूरत है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है। ऐसे में नेताओं को अपने बयान सोच-समझकर देने चाहिए, खासकर जब मामला आतंकवाद से जुड़ा हो।
**निष्कर्ष**
पहलगाम आतंकी हमला सिर्फ एक हमला नहीं था, बल्कि यह देश की अखंडता पर एक सीधा प्रहार था। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से सख्त कार्रवाई की बात कही गई है, और उम्मीद है कि दोषियों को जल्द ही न्याय मिलेगा। लेकिन इस बीच नेताओं को भी समझना होगा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकी हमले जैसे मुद्दों पर बयानबाजी से पहले जिम्मेदारी जरूरी है।
आतंक का जवाब राजनीति से नहीं, एकजुटता और साहस से दिया जाना चाहिए।
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