मोहन भागवत का चुनावी मंत्र ! दशरथ मांझी का उदाहरण देकर बिहार में चला दी बड़ी राजनीतिक चाल?
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### **मोहन भागवत का चुनावी संदेश! दशरथ मांझी का जिक्र कर बिहार में बिछाई नई सियासी बिसात?**
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत बिहार दौरे पर हैं, और इस दौरान उनके बयानों ने सियासी हलचल तेज कर दी है। सुपौल में उन्होंने न सिर्फ भारतीय संस्कृति और सभ्यता की महिमा गाई, बल्कि दशरथ मांझी का उदाहरण देकर एक बड़ा संदेश भी दे गए। चुनावी साल में भागवत का यह बयान क्या संकेत देता है? क्या यह किसी विशेष रणनीति का हिस्सा है? आइए, जानते हैं पूरी कहानी।
### **दशरथ मांझी का उदाहरण क्यों दिया मोहन भागवत ने?**
बिहार के गया जिले के दशरथ मांझी को कौन नहीं जानता? वह व्यक्ति जिसने अकेले अपने दम पर पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया। मोहन भागवत ने इसी उदाहरण को अपने संबोधन में दोहराया और कहा कि अगर संकल्प मजबूत हो तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। उन्होंने बिहार के लोगों की मेहनत, समर्पण और साहस की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में ऐसी मिसालें भरी पड़ी हैं। लेकिन सवाल यह है कि दशरथ मांझी का जिक्र कर भागवत ने किसे संदेश दिया?
### **बिहार चुनाव से पहले बड़ा संकेत?**
राजनीति के जानकारों का मानना है कि मोहन भागवत का यह बयान सिर्फ प्रेरणा देने के लिए नहीं था, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने हो सकते हैं। बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, और ऐसे समय में RSS प्रमुख का इस तरह का बयान देना एक विशेष रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
RSS और बीजेपी का रिश्ता जगजाहिर है। ऐसे में मोहन भागवत के बयान को बीजेपी की चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। क्या संघ बिहार में बीजेपी के लिए माहौल तैयार कर रहा है? क्या दशरथ मांझी का उदाहरण देकर उन्होंने यह संदेश दिया कि बीजेपी अपने दम पर बिहार में सरकार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है?
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### **'मैंने बिहार को 6 साल दिए' - मोहन भागवत का इमोशनल कनेक्शन**
भागवत ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि वह 6 साल तक बिहार में रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस राज्य से उनका गहरा जुड़ाव रहा है और वह जब भी यहां आते हैं, कई जगहों पर जाने का मन करता है, लेकिन समय की कमी के कारण संभव नहीं हो पाता।
उनका यह भावनात्मक जुड़ाव भी एक संकेत माना जा रहा है। क्या बिहार चुनाव में बीजेपी अपनी रणनीति को नई धार देने के लिए संघ की छत्रछाया में आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है?
### **संघ की शिक्षा नीति और बिहार में स्कूलों पर जो**
भागवत ने विद्या भारती द्वारा संचालित स्कूलों में बच्चों के दाखिले को बढ़ावा देने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों को बनाए रखने के लिए शिक्षा बेहद जरूरी है। बिहार में संघ लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा है, और यह बयान बताता है कि संघ अब इसे और मजबूती से आगे बढ़ाने के पक्ष में है।
### **राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया क्या होगी?**
अब सवाल यह है कि बिहार की दूसरी राजनीतिक पार्टियां इस बयान पर कैसी प्रतिक्रिया देंगी? क्या वे इसे बीजेपी की चुनावी रणनीति के तौर पर देखेंगी? या फिर इसे एक साधारण भाषण मानकर नजरअंदाज करेंगी?
बिहार की राजनीति में सामाजिक समीकरण बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, और ऐसे में मोहन भागवत के बयान को हल्के में नहीं लिया जा सकता। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान का बिहार की सियासत पर क्या असर पड़ता है।
### **निष्कर्ष**
मोहन भागवत का बिहार दौरा सिर्फ एक धार्मिक-सांस्कृतिक यात्रा नहीं थी, बल्कि इसमें छिपे राजनीतिक संकेतों को भी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। दशरथ मांझी का उदाहरण देकर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि मजबूत इच्छाशक्ति से हर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। लेकिन क्या यह बयान सिर्फ प्रेरणा देने के लिए था, या फिर बिहार चुनाव से पहले एक सियासी संकेत? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा!
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