बिहार में श्रद्धांजलि पर सियासत: RJD का पोस्टर वार, नीतीश सरकार और ट्रंप निशाने पर
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**बिहार में श्रद्धांजलि वाला पोस्टर वार: आरजेडी का नीतीश सरकार पर तीखा हमला, ट्रंप भी आए निशाने पर**
*लेखिका: राधा राणा*
बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है, इस बार वजह बनी है 'श्रद्धांजलि' और उसके बहाने लगे पोस्टर। शहीद जवानों के पार्थिव शरीर पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी को लेकर आरजेडी ने पटना में जोरदार पोस्टर वार छेड़ दिया है। इन पोस्टरों के जरिए न सिर्फ नीतीश कुमार सरकार को घेरा गया है, बल्कि अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक को निशाने पर ले लिया गया है।
हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान सीमा पर कई जवानों ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए, जिनमें बिहार के भी कई वीर सपूत शामिल हैं। सीवान के रामबाबू सिंह, नवादा के मनीष कुमार, नालंदा के सिकंदर राउत और छपरा के बीएसएफ सब इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज जैसे नाम आज पूरे राज्य को गर्व से भर देते हैं। मगर इन्हीं शहीदों की अंतिम विदाई पर जब राज्य सरकार की तरफ से कोई वरिष्ठ नेता या मंत्री मौजूद नहीं रहा, तो विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का अवसर मिल गया।
बुधवार को सीवान के जवान रामबाबू सिंह का पार्थिव शरीर जब पटना एयरपोर्ट पहुंचा, तो वहां न मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नजर आए, न ही दोनों उपमुख्यमंत्री। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव वहां मौजूद थे और उन्होंने न सिर्फ पुष्पांजलि अर्पित की, बल्कि मौके पर ही सरकार की चुप्पी पर सवाल भी उठाए।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सरकार को सेना और शहीदों की याद केवल चुनावी मंचों पर ही आती है, असल वक्त पर वह अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेती है। यही नाराजगी अब पोस्टरों के रूप में सड़कों पर दिखाई दे रही है। आरजेडी ने पटना के कई इलाकों में पोस्टर लगाए हैं जिनमें लिखा है – "कुछ तो शर्म करो सरकार!" इन पोस्टरों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी तस्वीरें शामिल हैं।
पोस्टर में एक और बड़ा सवाल उठाया गया है – "सेना में इतनी काबिलियत है कि वो पाकिस्तान को तबाह कर दे, तो फिर तीसरे देश के कहने पर संघर्षविराम क्यों?" यह सवाल सीधे तौर पर अमेरिका की मध्यस्थता पर उठाया गया है, जो कि भारत-पाकिस्तान सीजफायर को लेकर चर्चा में रहा है।
रामबाबू सिंह के मामले ने भी लोगों को भावुक कर दिया है। शादी को मुश्किल से चार महीने हुए थे और उनकी पत्नी गर्भवती हैं। रामबाबू को शहीद का दर्जा नहीं दिया गया क्योंकि वह सड़क हादसे में घायल हुए थे, लेकिन क्या सिर्फ तकनीकी कारणों से संवेदनाएं भी सीमित हो जानी चाहिए? यही वो सवाल है जो आज पूरे बिहार को बेचैन कर रहा है।
राजनीति में विरोध स्वाभाविक है, लेकिन जब बात शहीदों की हो, तब हर नेता और हर सरकार से संवेदनशीलता की उम्मीद की जाती है। आरजेडी का यह पोस्टर वार चाहे सियासी हो, पर जिस मुद्दे को केंद्र में रखा गया है, वह बेहद गंभीर है—शहीदों का सम्मान और सरकार की नैतिक ज़िम्मेदारी।
अब देखना यह है कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है। क्या वह चुप्पी साधे रहेगी या फिर जनता को जवाब देगी? फिलहाल, पटना की दीवारों पर लगे ये पोस्टर खुद सवाल बनकर खड़े हैं—क्या हमारे शहीदों का सम्मान अब सिर्फ राजनीति का हिस्सा बन कर रह गया है?
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