बिना अनुमति आंबेडकर छात्रावास पहुंचे Rahul Gandhi
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**राहुल गांधी का दरभंगा दौरा: शिक्षा और सामाजिक न्याय को लेकर उठाई बुलंद आवाज़**
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी एक बार फिर अपने तेवरों और साफ़ बयानों की वजह से चर्चा में हैं। इस बार उनका बिहार का दरभंगा दौरा सुर्खियों में है, जहां उन्होंने बिना प्रशासनिक अनुमति के आंबेडकर छात्रावास में छात्रों से मुलाकात की और ‘शिक्षा न्याय संवाद’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राहुल गांधी का यह दौरा राजनीतिक दृष्टिकोण से भी अहम माना जा रहा है।
दरअसल, दरभंगा जिला प्रशासन ने कांग्रेस पार्टी को टाउन हॉल में कार्यक्रम करने की अनुमति दी थी, लेकिन राहुल गांधी अड़ गए कि वे आंबेडकर छात्रावास में ही छात्रों से संवाद करेंगे। प्रशासन की तरफ से यह भी कहा गया कि छात्रावास क्षेत्र में धारा 163 लागू है और वहां कार्यक्रम नहीं हो सकता। इसके बावजूद राहुल गांधी अपने काफिले के साथ छात्रावास की ओर रवाना हुए। जब प्रशासन ने उन्हें खानकाह चौक पर रोकने की कोशिश की, तो वे कार्यकर्ताओं के साथ पैदल ही आंबेडकर छात्रावास की ओर बढ़ गए।
आख़िरकार राहुल गांधी छात्रावास पहुंच ही गए और वहां मौजूद छात्रों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि “कोई शक्ति मुझे छात्रों से बात करने से नहीं रोक सकती।” राहुल गांधी ने मंच से यह भी कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, संविधान से चलता है, न कि तानाशाही से। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमें सामाजिक न्याय और शिक्षा के लिए आवाज़ उठाने से कोई नहीं रोक सकता।”
अपने भाषण में राहुल गांधी ने दलित छात्रावासों की बदतर स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि यदि कांग्रेस की सरकार बनती है तो दलित छात्रावासों की हालत सुधारी जाएगी। उन्होंने इस दौरान जातीय जनगणना की भी ज़ोरदार वकालत की और कहा कि केरल की तर्ज पर पूरे देश में जातीय जनगणना होनी चाहिए। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि देश का धन 5-10 उद्योगपतियों के पास केंद्रित हो गया है और आम नागरिकों को उनका हक नहीं मिल रहा।
राहुल गांधी के इस दौरे के बाद कांग्रेस पार्टी ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “कायर समझा था क्या? फायर हूं मैं।” कांग्रेस पार्टी के इस तेवर से यह साफ़ संकेत है कि पार्टी अब बिहार में आक्रामक रणनीति अपनाने की तैयारी में है।
राहुल गांधी ने छात्रों के साथ संवाद के दौरान प्रदीप कुमार नामक एक छात्र से बातचीत भी की, जो मधुबनी जिले का रहने वाला है। बातचीत के दौरान उन्होंने छात्रों की समस्याएं सुनीं और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार का भरोसा दिलाया।
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस-प्रशासन भी हलकान नजर आया। राहुल गांधी के अचानक पैदल चलने और कार्यकर्ताओं की भीड़ के कारण सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रशासन के रोकने के बावजूद राहुल गांधी का छात्रावास पहुंच जाना और वहां से साफ़-साफ़ शब्दों में अपनी बात रखना, इस बात का प्रतीक है कि कांग्रेस अब छात्रों और शिक्षा जैसे मुद्दों पर जन समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।
राहुल गांधी का यह दौरा एक सियासी संदेश भी देता है कि कांग्रेस सामाजिक न्याय, शिक्षा और संविधान की रक्षा के मुद्दों पर अपनी आवाज़ बुलंद करती रहेगी। बिहार की सियासत में यह दौरा क्या असर डालेगा, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इतना तो तय है कि राहुल गांधी ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वे सत्ता और प्रशासन की रोक के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
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