20 साल की सरकार पर Prashant Kishor का वार:
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**बिहार की सियासत में गरमी तेज: किसानों के मुद्दे पर नीतीश कुमार पर बरसे प्रशांत किशोर**
बिहार में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। एक तरफ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों पर नीतीश सरकार को घेर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर भी खुलकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। खासकर किसानों के मुद्दे पर प्रशांत किशोर का रुख बेहद आक्रामक है।
हाल ही में प्रशांत किशोर ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले 20 वर्षों से सत्ता में हैं, लेकिन किसानों को अब तक उनकी उपज का वाजिब मूल्य नहीं मिल पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से कुछ महीने पहले किसानों को लुभाने की कोशिश की जा रही है, जबकि वर्षों तक उनकी समस्याओं की अनदेखी की गई। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि धान की कीमत 1500 से 1900 रुपये प्रति क्विंटल तक ही रही, जबकि लागत और मेहनत उससे कहीं ज्यादा होती है।
प्रशांत किशोर ने जनता से अपील करते हुए कहा कि अब बिहार की जनता को जात-पात और धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य के आधार पर वोट देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों ने कभी लालू यादव के नाम पर, तो कभी प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर वोट किया, लेकिन अब समय है कि जन सुराज को मौका दिया जाए।
इतना ही नहीं, जब एक पत्रकार ने प्रशांत किशोर से बिहार के स्वास्थ्य मंत्री के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने व्यंग्य करते हुए पूछा कि क्या किसी को पता है कि बिहार का स्वास्थ्य मंत्री कौन है? उन्होंने मंगल पांडेय का नाम लेते हुए कहा कि कोरोना काल में जब बिहार के लाखों लोग मुश्किल हालात में थे, तब स्वास्थ्य मंत्री नदारद थे और सरकार पूरी तरह असहाय नजर आई।
प्रशांत किशोर ने कोरोना काल की याद दिलाते हुए कहा कि उस दौर की तकलीफें लोगों के दिलों-दिमाग में अब भी ताजा हैं। उन्होंने कहा कि उस समय हजारों लोग सड़कों पर पैदल चलने को मजबूर थे, लेकिन सरकार ने उनकी तकलीफों को गंभीरता से नहीं लिया।
इसके साथ ही उन्होंने लालू यादव और उनके परिवार पर भी हमला बोलते हुए कहा कि बिहार की राजनीति अब एक परिवार तक सीमित हो गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एक ही परिवार के लोग मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्री और सांसद बनेंगे? उन्होंने कहा कि जनता को अब इस परिवारवादी राजनीति से बाहर निकलकर विकासवादी सोच को अपनाना होगा।
प्रशांत किशोर की जन सुराज यात्रा लगातार बिहार के अलग-अलग इलाकों में जाकर जनता से सीधा संवाद कर रही है। वे लोगों से पूछ रहे हैं कि क्या वे सच्चे बदलाव के लिए तैयार हैं? उनका कहना है कि सिर्फ नारे लगाने से कुछ नहीं होता, उसके लिए ठोस योजना, नीति और इच्छाशक्ति की जरूरत होती है।
बिहार की राजनीति में इस समय जो उठा-पटक चल रही है, वह साफ इशारा कर रही है कि आने वाले चुनाव बेहद दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। अब देखना यह है कि क्या जनता पुराने चेहरों पर ही भरोसा जताएगी या फिर किसी नए विकल्प को मौका देगी। फिलहाल इतना तय है कि किसानों, युवाओं और आम जनता के मुद्दे इस चुनाव का केंद्र बिंदु बनने वाले हैं।
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