जापान में जेडीयू सांसद संजय झा की चेतावनी: आज भारत है… कल आप हो सकते हैं
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**"आज भारत है… कल आप हो सकते हैं" – जापान में गूंजा जेडीयू सांसद संजय झा का आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश**
*लेखक: राधा राणा*
भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ अपनी मजबूत स्थिति को स्पष्ट किया है। इस बार भारत की यह आवाज जापान की राजधानी टोक्यो में गूंजी, जहां जेडीयू सांसद संजय कुमार झा के नेतृत्व में एक सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल तीन दिवसीय यात्रा पर पहुंचा। इस यात्रा का मकसद था—दुनिया को यह बताना कि आतंकवाद एक वैश्विक खतरा है, और इसके खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की जरूरत है।
संजय झा का संदेश सीधा और प्रभावशाली था: *"आज भारत है… कल आप हो सकते हैं। इसलिए तटस्थ मत रहिए, आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हो जाइए।"* उन्होंने टोक्यो में मौजूद अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंकों और अधिकारियों के सामने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने याद दिलाया कि 2008 के मुंबई आतंकी हमले में दो जापानी नागरिक भी मारे गए थे और उस हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ था।
भारत की इस कोशिश का मकसद सिर्फ अपने देश को सुरक्षित बनाना नहीं, बल्कि वैश्विक समुदाय को आतंकवाद की भयावहता के प्रति जागरूक करना भी है। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की ओर इशारा करते हुए संजय झा ने बताया कि कैसे आतंकियों को ट्रेनिंग दी जाती है, फंडिंग की जाती है और भारत समेत अन्य देशों में भेजा जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि आज यह खतरा भारत तक सीमित है, लेकिन कल यह दुनिया के किसी भी कोने तक पहुंच सकता है।
इस प्रतिनिधिमंडल की यात्रा का एक और अहम पहलू रहा—*ऑपरेशन सिंदूर*। यह ऑपरेशन आतंक के खिलाफ भारत की त्वरित और निर्णायक कार्रवाई का उदाहरण है। जापान में इस ऑपरेशन की भी सराहना की गई और भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को समर्थन मिला। जापान के विदेश मंत्री ताकेशी इवाया ने भी भारत के प्रयासों की सराहना की और पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करते हुए एकजुटता जताई।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल बीजेपी सांसद डॉ. हेमांग जोशी ने कहा कि भारत का यह मिशन आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकता को मजबूत करना है। उन्होंने इस यात्रा के पहले दिन को 'फलदायी' बताया और कहा कि दुनिया अब भारत के रुख को गंभीरता से ले रही है।
भारत ने यह भी संदेश दिया कि आतंकवाद से निपटने के लिए सिर्फ सैन्य कार्रवाई ही नहीं, बल्कि कूटनीतिक प्रयास भी जरूरी हैं। टोक्यो में मौजूद थिंक टैंकों के साथ संवाद इस दिशा में एक बड़ा कदम है, क्योंकि नीति निर्धारण और वैश्विक सहयोग के लिए यह मंच अहम भूमिका निभाता है।
भारत का यह रुख बताता है कि वह अब सिर्फ सहने वाला देश नहीं रहा, बल्कि अब वह दुनिया को जागरूक करने वाला नेतृत्वकर्ता बन चुका है। संजय झा जैसे नेता जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बात रखते हैं, तो यह केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं होती, बल्कि यह उस 140 करोड़ जनता की पीड़ा और दृढ़ निश्चय की आवाज होती है, जो आतंकवाद से पीड़ित रही है और अब उसका जड़ से खात्मा चाहती है।
इस लेख के अंत में यही कहा जा सकता है कि भारत की यह पहल सराहनीय है। जब एक देश आतंकवाद के खिलाफ दुनिया को एकजुट करने की कोशिश करता है, तो यह सिर्फ उसकी मजबूती नहीं दिखाता, बल्कि उसकी जिम्मेदारी का भी प्रमाण होता है। और यह जिम्मेदारी अब सिर्फ भारत की नहीं रहनी चाहिए—यह पूरे विश्व की होनी चाहिए।
**क्योंकि आज भारत है… कल आप हो सकते हैं।**
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