Pahalgam हमले पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में क्यों नहीं पहुंची जेडीयू? पार्टी ने दी सफाई! | JDU|

Pahalgam हमले पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में क्यों नहीं पहुंची जेडीयू? पार्टी ने दी सफाई! | JDU|


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**पहलगाम आतंकी हमले पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में क्यों नहीं पहुंची जेडीयू? पार्टी ने दी सफाई**

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद देशभर में आक्रोश का माहौल है। इस हमले को लेकर दिल्ली में केंद्र सरकार ने गुरुवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसका मकसद सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर लाकर आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति बनाना था। लेकिन इस अहम बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

**कांग्रेस का सवाल, जेडीयू की सफाई**

सर्वदलीय बैठक में जेडीयू के न पहुंचने पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर लिखा, “प्रधानमंत्री की प्राथमिकता चुनाव है, जेडीयू की प्राथमिकता प्रधानमंत्री हैं। आतंकी हमले पर सर्वदलीय बैठक का इंतजार किया जा सकता है।” कांग्रेस के इस तंज के बाद जेडीयू की ओर से सफाई आई। 


जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन सिंह ने कहा कि पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता बिहार के मधुबनी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में शामिल थे, जिसके चलते वे दिल्ली में आयोजित बैठक में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने साफ किया कि पार्टी राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ खड़ी है और जो भी फैसला देशहित में होगा, जेडीयू उसका समर्थन करेगी।


**पीएम मोदी का कड़ा संदेश**


बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर में पंचायती राज दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसभा को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की और आतंकियों को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “जो भी इस हमले के पीछे हैं, उन्हें ऐसी सज़ा दी जाएगी, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।” इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह समेत एनडीए के कई नेता मौजूद थे।


**क्या चुनावी व्यस्तता ज्यादा ज़रूरी थी?**


जेडीयू की सफाई के बावजूद कई सवाल उठ रहे हैं। क्या एक आतंकी हमले जैसी गंभीर घटना पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से ज्यादा जरूरी एक चुनावी सभा हो सकती है? क्या जेडीयू को दिल्ली बैठक में प्रतिनिधि भेजने का कोई और विकल्प नहीं था? विपक्ष मानता है कि ऐसी बैठकों में सभी दलों की उपस्थिति ज़रूरी होती है ताकि सरकार को हर दृष्टिकोण से निर्णय लेने में मदद मिले और आतंक के खिलाफ एक सशक्त संदेश दिया जा सके।


**राजनीति बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा**


यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा की हो, तब सभी राजनीतिक दलों को एकजुटता दिखानी चाहिए। राजनीति और चुनावों से परे, आतंकवाद एक ऐसा विषय है जिस पर पूरे देश को एक सुर में बोलना चाहिए। 


सवाल यह नहीं है कि कौन बैठक में आया और कौन नहीं, बल्कि असली मुद्दा यह है कि क्या हम ऐसे समय में एकजुट हैं या नहीं। जनता को नेताओं से यही उम्मीद रहती है कि वो अपने राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखकर देशहित को प्राथमिकता दें।


**निष्कर्ष**


जेडीयू की गैरमौजूदगी पर उठे सवालों के बीच यह ज़रूरी है कि सभी राजनीतिक दल आत्ममंथन करें और यह तय करें कि राष्ट्रीय मुद्दों पर उन्हें कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एकता ही सबसे बड़ा हथियार है और यही संदेश देश की जनता को चाहिए।

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