सावित्रीबाई फुले पर बनी फिल्म ‘फुले’ को टैक्स फ्री करने की उठी मांग!

सावित्रीबाई फुले पर बनी फिल्म ‘फुले’ को टैक्स फ्री करने की उठी मांग!


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**सावित्रीबाई फुले पर बनी फिल्म ‘फुले’ को टैक्स फ्री करने की उठी मांग, उपेंद्र कुशवाहा ने सरकार से किया आग्रह**


भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले और उनके पति ज्योतिराव फुले के संघर्षों पर आधारित फिल्म *‘फुले’* 25 अप्रैल को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। इस ऐतिहासिक और प्रेरणादायक फिल्म को लेकर अब बिहार की राजनीति में भी हलचल देखने को मिल रही है। बिहार के पूर्व शिक्षा मंत्री और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने फिल्म को लेकर एक अहम मांग उठाई है। उन्होंने कहा है कि यह फिल्म समाज को जागरूक करने वाली है और सरकार को चाहिए कि इसे टैक्स फ्री किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देख सकें और फुले दंपति के संघर्षों से प्रेरणा ले सकें।


उपेंद्र कुशवाहा ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट करते हुए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से अपील की कि वे इस फिल्म को टैक्स फ्री करें। उन्होंने लिखा, *“सभी राज्यों के माननीय मुख्यमंत्री जी से विनम्र निवेदन है कि #phulemovie को टैक्सफ्री घोषित करें ताकि फुले दंपति के संघर्षों को आम लोग आसानी से जान व समझ सकें और अपने जीवन में उतारकर बिहार और देश को लाभान्वित कर सकें।”* उनका मानना है कि अगर यह फिल्म टैक्स फ्री होती है तो यह ज्यादा दर्शकों तक पहुंचेगी और इसके पीछे छिपा सामाजिक संदेश लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।


गौरतलब है कि फिल्म *‘फुले’* पहले 11 अप्रैल को रिलीज होने वाली थी, लेकिन फिल्म में ब्राह्मणों के चित्रण को लेकर उपजे विवाद के चलते इसकी रिलीज टाल दी गई थी। अब विवादों से निपटने के बाद इसे 25 अप्रैल को रिलीज किया जा रहा है। फिल्म में प्रतीक गांधी और पत्रलेखा मुख्य भूमिका में नजर आएंगे।


फुले दंपति ने 19वीं सदी में महिला शिक्षा, दलित अधिकार और सामाजिक समानता के लिए ऐतिहासिक काम किया था। सावित्रीबाई फुले को देश की पहली महिला शिक्षिका माना जाता है, जिन्होंने बालिकाओं के लिए पहला स्कूल खोला था और समाज की तमाम रूढ़ियों के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनकी यह कहानी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी तब थी।


इस फिल्म को टैक्स फ्री करने की मांग पर अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकारें क्या रुख अपनाती हैं। यदि फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया जाता है, तो यह समाज के लिए न सिर्फ एक प्रेरणादायक कदम होगा, बल्कि शिक्षा और सामाजिक सुधार की दिशा में भी एक सकारात्मक संदेश होगा।  


फिल्म *‘फुले’* केवल एक बायोपिक नहीं है, बल्कि यह उस सोच का प्रतिनिधित्व करती है जो समाज में बराबरी, शिक्षा और न्याय की बात करती है। ऐसे में अगर यह फिल्म ज्यादा लोगों तक पहुंचे और समाज को सोचने पर मजबूर करे, तो यह अपने मकसद में पूरी तरह कामयाब होगी।

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