NDA के ये दो दांवेदार बिगाड़ सकते हैं बिहार चुनाव का खेल — चिराग पासवान और निशिकांत दूबे ने बढ़ाई सियासी हलचल!
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बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव 2025 का समय करीब आ रहा है, वैसे-वैसे सियासी हलचल भी तेज होती जा रही है। एनडीए गठबंधन, जो अभी तक एकजुट नजर आता था, अब अंदर ही अंदर दरारों से जूझता दिख रहा है। इस बार दो चेहरे एनडीए के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं — एक हैं लोजपा (रामविलास) के नेता चिराग पासवान और दूसरे बीजेपी के झारखंड से सांसद निशिकांत दूबे। दोनों नेताओं के बयानों ने एनडीए के सियासी समीकरणों में नई हलचल पैदा कर दी है।
सबसे पहले बात करते हैं चिराग पासवान की। हाल ही में चिराग पासवान ने यह संकेत दिए हैं कि वे बिहार विधानसभा चुनाव में एक अहम भूमिका निभाने जा रहे हैं। उनके इस बयान से बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है। जेडीयू और बीजेपी, दोनों ही उनके इस बयान से असहज हो गए हैं। दरअसल, 2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग ने अकेले दम पर एनडीए खासतौर पर जेडीयू का गणित बिगाड़ दिया था। भले ही उनकी पार्टी ज्यादा सीटें न जीत पाई हो, लेकिन वोटकटवा बनकर उन्होंने नीतीश कुमार की राह मुश्किल कर दी थी। अब जब चिराग ने फिर से चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं तो सवाल उठता है कि क्या इस बार भी वो एनडीए का खेल बिगाड़ देंगे?
चिराग पासवान की यह रणनीति एनडीए के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। जेडीयू पहले ही साफ कर चुका है कि चुनाव के बाद नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे। पार्टी इस मांग पर अड़ी हुई है कि बीजेपी पहले से ही इस बात की घोषणा करे। ऐसे में चिराग पासवान का बयान जेडीयू और बीजेपी की इस जुगलबंदी पर पानी फेर सकता है। वहीं, दूसरी तरफ बीजेपी के सामने निशिकांत दूबे की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
निशिकांत दूबे ने हाल ही में वक्फ संशोधन कानून पर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम फैसले के बाद जो आक्रामक बयान दिए, उसने बीजेपी के लिए नई मुश्किल खड़ी कर दी। पार्टी नेतृत्व ने उनके बयान से खुद को अलग कर लिया, लेकिन सोशल मीडिया पर पार्टी समर्थकों ने खुलकर निशिकांत दूबे का साथ देना शुरू कर दिया। इससे पार्टी के भीतर एक असहज स्थिति पैदा हो गई है। अब पार्टी के लिए मुश्किल यह है कि वह अपने नेता के बयानों से दूरी बनाकर समर्थकों की नाराजगी मोल नहीं ले सकती और ना ही इन बयानों पर पूरी तरह से सहमति जता सकती है।
एक तरफ चिराग पासवान का सत्ता में हिस्सेदारी का सपना और दूसरी तरफ निशिकांत दूबे के बयानों से उपजा विवाद — एनडीए के लिए ये दोनों ही सिरदर्द बन चुके हैं। ऐसे में सवाल यही है कि क्या एनडीए इस बार इन दोनों नेताओं को साथ लेकर चुनावी मैदान में उतर पाएगा या फिर एक बार फिर से अंदरूनी खींचतान का शिकार होकर बिहार की राजनीति में पिछड़ जाएगा।
फिलहाल बिहार की राजनीति में चिराग और निशिकांत दोनों ने चुनावी समर से पहले ही हलचल मचा दी है। आने वाले वक्त में ये देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी और जेडीयू इस सियासी चुनौती से कैसे निपटते हैं और एनडीए में सियासी संतुलन कैसे कायम करते हैं। इतना साफ है कि बिहार चुनाव 2025 में चिराग पासवान और निशिकांत दूबे दोनों की भूमिका पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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