पाखंडियों का बाप कहने पर जीतन राम मांझी का पलटवार

पाखंडियों का बाप कहने पर जीतन राम मांझी का पलटवार


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बिहार की राजनीति में शब्दों के बाण लगातार चलते रहते हैं। हाल ही में आरजेडी नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने एक बयान में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को ‘पाखंडियों का बाप’ कहकर संबोधित किया, जिसके बाद बिहार की राजनीति में हलचल मच गई। अब जीतन राम मांझी ने चंद्रशेखर के इस बयान पर शांत लेकिन करारा जवाब दिया है। गया के डेल्हा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मांझी ने साफ कहा कि किसी की भावना की इज्जत करना कोई पाखंड या रूढ़िवादिता नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक समझदारी और आपसी सम्मान की मिसाल है।


कार्यक्रम में मौजूद लोगों के सामने मांझी ने कहा कि वो मंदिर-मस्जिद में पूजा करने नहीं, बल्कि वहां लोगों की भावना और प्रतिष्ठा का सम्मान करने जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब लोग किसी खास जगह पर आमंत्रित करते हैं तो उनकी भावना को ठेस न पहुंचे, इस सोच के साथ वे वहां जाते हैं। उन्होंने चंद्रशेखर पर तंज कसते हुए कहा कि "आप प्रोफेसर हैं, विद्वान हैं, आपको इस बात की समझ होनी चाहिए कि किसी की भावना की कदर करना कोई गलत बात नहीं है।"


मांझी ने आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि भारत अब आर्थिक रूप से 11वें नंबर से 7वें स्थान पर आ चुका है और जल्दी ही तीसरे पायदान पर होगा। उन्होंने कहा कि देश विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है और ऐसे समय में धर्म या पार्टी के नाम पर कटाक्ष करना या भटकाव पैदा करना सही नहीं है। मांझी ने साफ शब्दों में कहा कि वे सिर्फ किसी की धार्मिक भावना का सम्मान करने के लिए मंदिर-मस्जिद जाते हैं, पूजा-पाठ उनकी प्राथमिकता नहीं है।


इस मौके पर मांझी ने बिहार की राजनीति में एक और बड़ा बयान दिया। उन्होंने महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे के सवाल पर तेजस्वी यादव को निशाने पर लेते हुए कहा कि तेजस्वी को महज कन्वीनर बनाया गया है, न कि मुख्यमंत्री का उम्मीदवार। उन्होंने कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री पद की कोई वैकेंसी नहीं है, अभी भी नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री हैं और आगे भी वही रहेंगे। मांझी ने दावा किया कि 2025 के चुनाव में एनडीए 225 सीटों के साथ भारी बहुमत से सत्ता में लौटेगा।


अपने पार्टी ‘हम’ के चुनावी मंसूबों पर भी मांझी ने खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी एनडीए गठबंधन के साथ मजबूती से खड़ी है और सीटों का बंटवारा शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत में तय किया जाएगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लोग 35 से 40 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी की मांग कर रहे हैं। मांझी ने यह भी भरोसा दिलाया कि यदि उनकी पार्टी 20 सीटों पर जीत हासिल करती है तो वो बिहार में वोकेशनल एजुकेशन को फ्री कराएंगे और बच्चियों के लिए पहले से किए गए वादों को हर हाल में लागू करवाएंगे।


इस पूरी बयानबाजी से साफ है कि बिहार की राजनीति में अभी सियासी तापमान और बढ़ेगा। एक तरफ जहां चंद्रशेखर जैसे नेता खुले तौर पर कटाक्ष कर रहे हैं, वहीं मांझी संयमित लेकिन मजबूत शब्दों में जवाब दे रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि ये जुबानी जंग आने वाले विधानसभा चुनावों में किस रूप में असर डालती है।

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