जातिगत राजनीति नहीं,विकास की बात करें: चिराग पासवान का MY फॉर्मूला और बिहार विजन

जातिगत राजनीति नहीं,विकास की बात करें: चिराग पासवान का MY फॉर्मूला और बिहार विजन


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**"जातिगत राजनीति नहीं, विकास की बात करें: चिराग पासवान का MY फॉर्मूला और बिहार विजन"*

नई दिल्ली में आयोजित इंडियन एक्सप्रेस के ‘एक्सप्रेस अड्डा’ कार्यक्रम में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने अपने स्पष्ट विचारों से लोगों का ध्यान खींचा। चिराग ने एक तरफ जहां जातिगत जनगणना का समर्थन किया, वहीं दूसरी ओर जाति आधारित राजनीति से साफ इनकार किया। उनका कहना है कि जाति हमारे देश की एक सच्चाई है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता, लेकिन राजनीति का आधार इसे बनाना देश और समाज के लिए नुकसानदायक है।

चिराग पासवान ने कार्यक्रम में साफ कहा कि सरकारों को समाज के हर तबके के लिए योजनाएं बनानी हैं, और इसके लिए आंकड़ों की जरूरत होती है। जातिगत जनगणना उन्हीं आंकड़ों का स्रोत बन सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इन आंकड़ों को सार्वजनिक न किया जाए, क्योंकि इससे जातिवाद को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने राज्य सरकारों को इन आंकड़ों तक सीमित रखने का सुझाव दिया।


अपनी राजनीतिक सोच और रणनीति पर बात करते हुए चिराग ने ‘MY फॉर्मूला’ का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनका MY फॉर्मूला 'महिला और युवा' को केंद्र में रखकर काम करने पर आधारित है। चिराग ने बताया कि उनकी पार्टी के पांच सांसदों में से दो महिलाएं हैं, जो यह दिखाता है कि वे महिलाओं को राजनीतिक मंच पर बराबर का स्थान देना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने बिहार के युवाओं पर भी भरोसा जताया और कहा कि जब बिहारी राज्य की सीमाओं से बाहर निकलते हैं और जाति की पहचान से आगे बढ़ते हैं, तो हर क्षेत्र में श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं—चाहे वह मीडिया हो, कॉर्पोरेट हो या फिर प्रशासनिक सेवा।


बात बिहार की हुई तो चिराग ने साफ कहा कि ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ का मंत्र ही उनकी राजनीति की दिशा है। उन्होंने बताया कि बिहार के विकास के लिए राज्य और केंद्र में एक जैसी सरकार होना जरूरी है। उन्हें विश्वास है कि मौजूदा एनडीए गठबंधन राज्य में अगला विधानसभा चुनाव जीतकर फिर से सत्ता में आएगा।


उन्होंने वक्फ कानून और सीएए जैसे मुद्दों पर भी खुलकर बात की और बताया कि कैसे कुछ तत्व इन कानूनों को लेकर लोगों में गलतफहमियां फैला रहे हैं। चिराग ने कहा कि CAA हो या अनुच्छेद 370, इन कानूनों के बारे में जो डर और अफवाहें फैलाई गई थीं, वो समय के साथ गलत साबित हुई हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि वक्फ कानून को लेकर भी लोगों की समझ धीरे-धीरे बदलेगी।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर करते हुए चिराग ने कहा कि वे खुद को मोदी का 'हनुमान' मानते हैं। उन्होंने याद किया कि उनके पिता रामविलास पासवान के निधन के बाद जब वे राजनीतिक और पारिवारिक चुनौतियों से जूझ रहे थे, तब प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें मजबूत समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि उनके पिता हमेशा कहते थे कि मोदी काम करने वाले प्रधानमंत्री हैं, जो मंत्रियों को ज़िम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।


आज की राजनीति में बढ़ती कटुता पर चिंता जताते हुए चिराग ने कहा कि उनके सभी दलों में दोस्त हैं, और वो व्यक्तिगत रिश्तों को राजनीति से ऊपर रखते हैं। उन्होंने तेजस्वी यादव को अपना 'छोटा भाई' बताया और कहा कि आजकल पार्टी प्रमुखों को डर है कि उनके नेताओं की दूसरे दलों से दोस्ती उनकी छवि को नुकसान पहुंचा सकती है।


भाजपा के सहयोगियों को 'निगल' जाने की बात पर चिराग ने जवाब दिया कि जब तक कोई दल जनता से जुड़ा रहेगा और अपनी पहचान बनाए रखेगा, तब तक उसे कोई कमजोर नहीं कर सकता। उन्होंने साफ कहा कि अगर वे बिहार की जनता से दूर हो गए, तो उनका राजनीतिक पतन तय है।


गठबंधन की साझा न्यूनतम कार्यक्रम (CMP) जैसी व्यवस्थाओं की गैर-मौजूदगी पर चिराग ने कहा कि अब इसकी जरूरत नहीं रह गई है, क्योंकि संवाद के नए तरीके मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि अगर उन्हें किसी मुद्दे पर बात करनी हो, तो वे सीधे पीएम मोदी या गृह मंत्री अमित शाह से संपर्क कर सकते हैं।


अंत में चिराग ने यह भी स्वीकार किया कि राजनीतिक परिवार से होने का कुछ शुरुआती फायदा होता है, लेकिन अगर नेतृत्व में योग्यता नहीं होगी, तो ऐसी पार्टियां टिक नहीं पाएंगी। बिहार में महिलाओं को लेकर नीतीश कुमार के कामों की सराहना करते हुए उन्होंने शराबबंदी और महिलाओं की सुरक्षा की बात कही और बताया कि उन्होंने शराबबंदी का समर्थन तब भी किया था जब वे नीतीश कुमार के साथ गठबंधन में नहीं थे।


चिराग पासवान का यह संवाद साफ करता है कि वे विकास की राजनीति के पक्षधर हैं, जातिवाद की नहीं। उनका ‘महिला और युवा’ केंद्रित MY फॉर्मूला नई राजनीति की दिशा तय करता दिख रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार की जनता इस विजन को किस तरह स्वीकार करती है।

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