शाहनवाज हुसैन बोले: 'लव सदा रहेगा, लेकिन लव जिहाद नहीं' – अपनी लव स्टोरी से दिया बड़ा संदेश
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**शाहनवाज हुसैन बोले: "लव सदा रहेगा, लेकिन लव जिहाद नहीं" – अपनी लव स्टोरी से दिया बड़ा संदेश**
देश में 'लव जिहाद' को लेकर लगातार बहस और राजनीतिक बयानबाजी चल रही है। ऐसे माहौल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन का बयान सामने आया है, जिसने इस मुद्दे को एक अलग ही दृष्टिकोण से देखने का मौका दिया है। शाहनवाज हुसैन खुद मुस्लिम हैं और उनकी पत्नी रेणु हिंदू हैं। दोनों ने प्रेम विवाह किया था। O
ABP न्यूज़ से बातचीत में जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी लव स्टोरी पर भी 'लव जिहाद' का आरोप लगाया गया था, तो उन्होंने साफ कहा कि, "उस वक्त शायद ये शब्द इजाद नहीं हुआ था। हमारा लव था, जिहाद नहीं।" उन्होंने आगे कहा, "जो लोग प्लांड करके, एजेंडे के साथ शादी करते हैं, वही लव जिहाद करते हैं। लेकिन सच्चे दिल से की गई मोहब्बत को कोई नाम देने की जरूरत नहीं।"
शाहनवाज ने अपनी प्रेम कहानी को साझा करते हुए बताया कि साल 1986 में जब वो कॉलेज में ग्रेजुएशन कर रहे थे, तब पहली बार रेणु से उनकी मुलाकात हुई। रेणु उसी कॉलेज में पढ़ती थीं। पहली नजर में ही प्यार हो गया और फिर एक लंबा सफर तय करते हुए दोनों ने करीब 9 साल बाद शादी कर ली। खास बात यह रही कि दोनों परिवारों ने इस रिश्ते को सहर्ष स्वीकार किया।
उन्होंने बताया कि रेणु की एक झलक पाने के लिए वह रोज़ उसी बस से यात्रा करने लगे थे, जिससे रेणु कॉलेज जाती थीं। धीरे-धीरे दोस्ती बढ़ी, प्यार गहरा हुआ और फिर एक दिन दोनों ने जीवनभर साथ निभाने का फैसला किया। आज शाहनवाज और रेणु की शादी को 31 साल हो चुके हैं और उनके दो बेटे हैं – अदिब और अरबाज।
शाहनवाज का मानना है कि सच्चा प्यार कभी धर्म या जाति नहीं देखता। उन्होंने कहा, "आज के समय में अगर हमारी लव स्टोरी होती तो भी मुझ पर कोई आरोप नहीं लगता, क्योंकि ये रिश्ता सच्चे दिल से बना है। और आज भी उतना ही मजबूत है।"
उन्होंने यह भी जोड़ा, "मोहब्बत तो सदा रहेगा, लव सदा रहेगा, लेकिन लव जिहाद नहीं रहेगा।" उनका ये बयान इसलिए भी खास है क्योंकि अक्सर विपक्षी दल यह सवाल उठाते हैं कि जब खुद पार्टी के नेताओं ने अंतरधार्मिक विवाह किया है, तो फिर 'लव जिहाद' के नाम पर कानून और आरोप क्यों?
शाहनवाज हुसैन की यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब कई राज्यों में लव जिहाद को लेकर कानून बनाए जा चुके हैं और कई मामलों में युवाओं को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। ऐसे में उनका यह निजी और स्पष्ट बयान एक मिसाल के रूप में सामने आया है।
उनकी कहानी बताती है कि अगर रिश्ते में सच्चाई हो, परिवारों की रज़ामंदी हो और दिल से जुड़ाव हो, तो धर्म की दीवारें कोई मायने नहीं रखतीं।
शाहनवाज हुसैन का यह संदेश सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक सामाजिक सोच को दिशा देने वाला वक्तव्य है—जहां प्यार को समझने और स्वीकारने की ज़रूरत है, ना कि उसे शक की निगाह से देखने की।
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