"56 इंच का सीना अभी तक दिखा नहीं... Pahalgam Attack पर गरजे RJD नेता मृत्युंजय तिवारी"

"56 इंच का सीना अभी तक दिखा नहीं... Pahalgam Attack पर गरजे RJD नेता मृत्युंजय तिवारी"


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**56 इंच का सीना अभी तक दिखा नहीं... पहलगाम हमले पर गरजे RJD नेता मृत्युंजय तिवारी**  

पिछले कुछ दिनों से देश का माहौल एक बार फिर तनावपूर्ण है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हमले में निर्दोष भारतीयों की जान चली गई, और इसके बाद से लगातार केंद्र सरकार की नीतियों और सुरक्षात्मक उपायों को लेकर विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। खासतौर पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता मृत्युंजय तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा है।  

मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में आए थे, तब उन्होंने कहा था कि "एक सिर के बदले सौ लाएंगे" और खुद को 56 इंच के सीने वाला प्रधानमंत्री बताया था। अब वही तिवारी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर वो 56 इंच का सीना अभी तक देश की जनता को क्यों नहीं दिखा? उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मामलों में लगातार चूक हो रही है और इस बात को खुद सरकार ने भी स्वीकार किया है।  


उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले में जो भारतीय मारे गए हैं, उनके लिए देश को न्याय चाहिए और इसका जवाब भारत सरकार को देना होगा। तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार जो भी ठोस कदम आतंकवाद के खिलाफ उठाएगी, पूरा देश और पूरा विपक्ष उसके साथ खड़ा रहेगा, लेकिन सवाल उठाना भी जरूरी है कि अगर सरकार खुद मान रही है कि चूक हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?  


आरजेडी नेता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सामने आकर यह बताना चाहिए कि आखिर सुरक्षा में किस स्तर पर गलती हुई, और 2014 से लेकर अब तक हुई 4000 से ज्यादा आतंकी घटनाओं के लिए कौन जिम्मेदार है? उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए सिर्फ भाषण नहीं, ठोस और कठोर कदम जरूरी हैं।  


तिवारी ने कहा कि अब समय आ गया है जब राजनीतिक लाभ लेने की जगह राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि जब देश में 26 निर्दोष लोगों की चिताएं ठंडी नहीं हुई हैं, तब राजनीतिक बयानबाजी करना और इससे लाभ उठाने की कोशिश करना बेहद शर्मनाक है।  


गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए नागरिकों की संख्या ने देश को एक बार फिर उस दौर की याद दिला दी जब आतंकवाद ने आम जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित किया था। तिवारी ने केंद्र सरकार से यह मांग की कि वह जल्द से जल्द सख्त से सख्त कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हो सकें।  


उन्होंने यह भी कहा कि जो भी कार्रवाई हो वह केवल पाकिस्तान पर निशाना साधने के लिए न हो, बल्कि उस नीति का हिस्सा हो जिसमें आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने की रणनीति हो। उनका मानना है कि केवल बयानबाज़ी से देश की जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता, अब वक्त है कि सरकार परिणाम दिखाए।  


मृत्युंजय तिवारी की इस प्रतिक्रिया को विपक्ष की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है, जिसमें सरकार की आतंकवाद से निपटने की नीति पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। लेकिन उन्होंने साफ किया कि उनका मकसद राजनीति नहीं, बल्कि देशहित में सवाल उठाना है।  


देश आज जिस दौर से गुजर रहा है, उसमें एकजुटता, रणनीति और पारदर्शिता की जरूरत है। विपक्ष के सवाल और सरकार की जवाबदेही दोनों जरूरी हैं ताकि आने वाले समय में आतंकवाद की कोई जगह न रह जाए। मृत्युंजय तिवारी जैसे नेताओं के तीखे सवाल केंद्र सरकार के लिए एक चेतावनी भी हैं कि अब जनता को सिर्फ वादे नहीं, कार्रवाई चाहिए।

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