गांजा मत फूंकिए, फूंकना ही है तो 11 के बाद...!प्रशांत किशोर के मजाकिया बयान ने मचाया सियासी तूफान

गांजा मत फूंकिए, फूंकना ही है तो 11 के बाद...!प्रशांत किशोर के मजाकिया बयान ने मचाया सियासी तूफान


 YouTube video link....https://youtu.be/b6_UysaJsI4

**गांजा मत फूंकिए, फूंकना ही है तो 11 के बाद...: प्रशांत किशोर के बयान से मचा सियासी घमासान**


जन सुराज अभियान के सूत्रधार और चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह बना है उनका एक बयान, जो उन्होंने पटना के गांधी मैदान में जनसुराज की रैली के दौरान दिया। बयान कुछ ऐसा था जो ना सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी। उन्होंने अपने युवा कार्यकर्ताओं से मजाकिया अंदाज़ में कहा, "गांजा मत फूंको, अगर फूंकना ही है तो 11 अप्रैल के बाद फूंकना। उससे पहले नहीं।" इस बयान को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है।


प्रशांत किशोर ने अपने कार्यकर्ताओं को अनुशासन में रहने और स्वस्थ रहने की सलाह दी, लेकिन जिस अंदाज में उन्होंने बात कही, उसने वीडियो को वायरल कर दिया। वीडियो में पीके कहते हैं, "शरीर से मजबूत रहिएगा, दिमाग सचेत रहेगा तभी 11 को फूंकिएगा। उससे पहले नहीं फूंकना है। रात भर ग्रामीणों के साथ बैठकर गांजा मत फूंकिएगा।" इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "चाचा (नीतीश कुमार) का राज है, दारू बंद है, लिट्टी-चोखा के बाद गांजा सेशन मत शुरू कर दीजिएगा।"


इस बयान को कुछ लोगों ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में लिया, जबकि कई लोगों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाए कि क्या एक जिम्मेदार नेता को इस तरह के बयान देने चाहिए? वहीं, प्रशांत किशोर के समर्थकों का कहना है कि यह केवल एक व्यंग्यात्मक और ह्यूमर भरा संदेश था, जिसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।


प्रशांत किशोर ने रैली में बिहार की स्थिति पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि बिहार अब बदलाव चाहता है। उन्होंने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि वे मुस्लिम समुदाय के साथ विश्वासघात कर रहे हैं और उनके शासन में बिहार की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। उन्होंने लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर भी तीखा हमला करते हुए कहा कि जनता अब उनके ‘धोखेबाज रवैये’ को पहचान चुकी है।


प्रशांत किशोर का यह भी दावा है कि आने वाले छह महीनों में बिहार में चुनाव होने की संभावना है, और यह समय है जब जनता को जागरूक होकर निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब बिहार में बदलाव केवल भाषणों और वादों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि शिक्षा, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और पलायन जैसी समस्याओं पर ठोस काम होना चाहिए।


हालांकि पीके का ‘गांजा’ वाला बयान फिलहाल छाया हुआ है, लेकिन इसके पीछे उनका मकसद अपने कार्यकर्ताओं को अनुशासन में रखने का ही था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान का राजनीतिक असर क्या होता है—क्या यह उन्हें नुकसान पहुंचाएगा या यह उनके बेबाक अंदाज की पहचान बनकर उनके समर्थन में इजाफा करेगा।

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