बिहार की राजनीति में महागठबंधन की कलह! सचिन पायलट ने तेजस्वी को CM चेहरा मानने से किया इनकार!

बिहार की राजनीति में महागठबंधन की कलह! सचिन पायलट ने तेजस्वी को CM चेहरा मानने से किया इनकार!


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**बिहार की राजनीति में महागठबंधन की कलह! सचिन पायलट ने तेजस्वी को CM चेहरा मानने से किया इनकार, JDU ने कसा तंज**

बिहार की सियासत में मुख्यमंत्री पद को लेकर महागठबंधन के भीतर खींचतान तेज होती जा रही है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने हाल ही में खुद को महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया था, लेकिन अब कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने इस दावे को सिरे से नकार दिया है। पायलट के इस बयान के बाद जेडीयू ने चुटकी लेते हुए महागठबंधन पर निशाना साधा है और कहा है कि जिन दलों में आपस में ही भरोसा नहीं है, जनता उन पर कैसे भरोसा करेगी?

दरअसल, पटना पहुंचे सचिन पायलट ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह चुनाव जीतने के बाद तय किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि महागठबंधन को बहुमत मिलने की उम्मीद है, लेकिन नेता का चयन जीत के बाद होगा। यही बात कुछ दिन पहले बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु भी कह चुके हैं, जिससे यह साफ हो रहा है कि कांग्रेस अभी तेजस्वी को महागठबंधन का चेहरा मानने के मूड में नहीं है।


आरजेडी के लिए यह बयान किसी झटके से कम नहीं है। तेजस्वी यादव ने हाल ही में भुईंयां मुसहर सम्मेलन के दौरान खुद को गठबंधन का मुख्यमंत्री उम्मीदवार बताया था। अब कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया उनके इस दावे को कमजोर करती दिख रही है।


इस मौके पर जेडीयू ने भी हमला बोलने में देर नहीं की। जेडीयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने तंज कसते हुए कहा कि तेजस्वी खुद को सीएम फेस बता रहे हैं लेकिन कांग्रेस के नेता उन्हें मानने को तैयार नहीं हैं। महागठबंधन में नूराकुश्ती चल रही है और दिल्ली की तर्ज पर बिहार में भी कांग्रेस आरजेडी को किनारे करने की रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का बिहार में खुद कोई जनाधार नहीं है और वही अब गठबंधन के नेता पर सवाल उठा रही है, यह हास्यास्पद है।


जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी आरजेडी पर हमला करते हुए कहा कि तेजस्वी यादव ने खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था लेकिन अब उनके दावे पर कांग्रेस ने पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग एनडीए पर सवाल उठा रहे थे, उनकी अपनी स्थिति अब जगजाहिर हो गई है।


इस पूरे घटनाक्रम ने महागठबंधन के भीतर गहराते मतभेद को उजागर कर दिया है। चुनाव नजदीक हैं और ऐसे में अगर महागठबंधन की पार्टियां आपसी सहमति नहीं बना पाईं तो इसका सीधा फायदा एनडीए को हो सकता है। जनता भी अब यह सवाल पूछने लगी है कि जो दल आपस में ही एक राय नहीं बना पा रहे, वो राज्य की सत्ता कैसे संभालेंगे?


फिलहाल तेजस्वी यादव की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि आरजेडी इस स्थिति से बेहद असहज है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर महागठबंधन की क्या रणनीति होगी, यह देखना दिलचस्प होगा।


बिहार की राजनीति में यह घटनाक्रम बताता है कि सत्ता के सिंहासन तक पहुंचने का रास्ता केवल विपक्षी एकता से नहीं, बल्कि स्पष्ट नेतृत्व और भरोसे से भी तय होता है।

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