Rahul Gandhi विदेश जाते हैं और भारत की छवि खराब करते हैं: जीतन राम मांझी
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**जीतन राम मांझी का विपक्ष पर तीखा हमला: “देशप्रेम की भावना नहीं, विदेशों में भारत की छवि धूमिल कर रहे नेता”**
बिहार की राजनीति में रविवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख **जीतन राम मांझी** ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। गया में आयोजित एक जनसभा के दौरान उन्होंने **कांग्रेस और खासकर राहुल गांधी** पर सीधा आरोप लगाया कि वे विदेश जाकर **भारत की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं**।
मांझी ने कहा कि विपक्षी नेताओं में अब देश के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता की कमी दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब ये नेता विदेश जाते हैं, तो अपने ही देश की आलोचना कर वहां बैठे लोगों के सामने भारत की छवि धूमिल करने का काम करते हैं। मांझी के शब्दों में – *“अपने घर की शिकायतें दुनिया के सामने करना गैर-जिम्मेदाराना है और ये राष्ट्रहित में नहीं है।”*
### **'ऑपरेशन सिंदूर' पर सरकार की पीठ थपथपाई**
मांझी ने भारत द्वारा हाल ही में पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर किए गए सर्जिकल ऑपरेशन ‘**ऑपरेशन सिंदूर**’ की जमकर तारीफ की। उन्होंने इसे भारतीय सेना का *"साहसी और निर्णायक कदम"* बताते हुए कहा कि यह ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ भारत की स्पष्ट नीति को दर्शाता है। मांझी ने यह भी कहा कि इस कार्रवाई में **किसी भी पाकिस्तानी आम नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचाया गया**, जबकि पाकिस्तान अक्सर निर्दोष भारतीय नागरिकों को निशाना बनाता रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की सराहना करते हुए कहा – *“मोदी जी ने पहले ही साफ कर दिया था कि पाकिस्तान को उसकी हरकतों का जवाब मिलेगा, और अब वही हो रहा है। पाकिस्तान के 11 एयरबेस अस्थायी रूप से निष्क्रिय कर दिए गए हैं।”*
### **शशि थरूर को लेकर मांझी का समर्थन**
इस पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण पहलू रहा — कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद **डॉ. शशि थरूर** को भारत के अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल किए जाने का मुद्दा। मांझी ने इसका **समर्थन करते हुए** कहा कि थरूर एक अनुभवी और कुशल वक्ता हैं और वे **अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का पक्ष मजबूती से रख सकते हैं**।
उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वह विपक्ष में थे, तब भी उन्हें विदेश में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला था। आज मोदी सरकार उसी लोकतांत्रिक परंपरा को आगे बढ़ा रही है।
### **राजनीतिक रणनीति या राष्ट्रवाद की सियासत?**
मांझी का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में विपक्ष और सत्ताधारी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर अपने चरम पर है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद सरकार की विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति को लेकर सकारात्मक माहौल बना है, और NDA इस समय विपक्ष की आलोचनाओं को *राष्ट्रविरोधी* ठहराने की कोशिश में जुटा है।
विपक्षी दलों की तरफ से इस पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी लोकसभा चुनावों की *भूमिका तैयार करने की कोशिश* मान रहे हैं।
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**निष्कर्ष**
जीतन राम मांझी का यह बयान न केवल विपक्ष पर हमले की रणनीति का हिस्सा है, बल्कि NDA की राष्ट्रवादी राजनीति के एक और अध्याय की शुरुआत भी हो सकता है। अब देखना यह होगा कि विपक्ष इन आरोपों का जवाब किस तरह देता है — और जनता इस विमर्श को किस नज़रिए से देखती है।
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