Operation Sindoor : Indian Army की ऐतिहासिक कार्रवाई और हनुमान जी की नीति!

Operation Sindoor : Indian Army की ऐतिहासिक कार्रवाई और हनुमान जी की नीति!


 YouTube video link....https://youtu.be/LV56_0tYAUE

**ऑपरेशन सिंदूर: भारतीय सेना की ऐतिहासिक कार्रवाई और हनुमान जी की नीति**

भारतीय सेना ने हाल ही में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सफल सैन्य कार्रवाई की, जिसने भारतीय सेना की शक्ति और रणनीतिक क्षमता को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया। इस ऑपरेशन के जरिए भारतीय सेना ने 6-7 मई की रात को 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के ठिकाने शामिल थे। यह ऑपरेशन उस आतंकी हमले का प्रतिशोध था, जो 22 अप्रैल को पहलगाम में हुआ था, जिसमें भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे।


ऑपरेशन सिंदूर को लेकर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने भारतीय सेना की कार्रवाई को धार्मिक दृष्टिकोण से समझाने के लिए रामचरितमानस के सुंदरकांड की एक चौपाई का उदाहरण दिया, जिसमें हनुमान जी ने कहा था, "जिन्ह मोहि मारा, ते मैं मारे।" इस चौपाई का संदर्भ देते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ने केवल उन्हीं को निशाना बनाया, जिन्होंने भारत के मासूम नागरिकों और सैनिकों पर हमला किया। इस संदर्भ में, राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि भारत कोई युद्ध नहीं चाहता, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाता है।


**हनुमान जी की नीति और भारतीय सेना की सोच**


हनुमान जी की नीति को भारतीय सैन्य दृष्टिकोण से जोड़ा जा सकता है। सुंदरकांड की चौपाई में हनुमान जी स्पष्ट रूप से कहते हैं कि उन्होंने सिर्फ उन्हीं का वध किया, जिन्होंने उन पर हमला किया। यह नीति स्पष्ट रूप से यह संदेश देती है कि युद्ध किसी भी राष्ट्र की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए, लेकिन जब कोई आपके खिलाफ आक्रमण करे, तो जवाब देना आपका कर्तव्य है। भारतीय सेना ने भी यही किया। उन्होंने आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की, लेकिन किसी पाकिस्तानी नागरिक या सैन्य प्रतिष्ठान को नुकसान नहीं पहुंचाया। यह भारतीय सेना की नीति का हिस्सा था कि उनका उद्देश्य आतंकवाद को समाप्त करना है, न कि निर्दोषों को नुकसान पहुंचाना।


**ऑपरेशन सिंदूर का धार्मिक और सैन्य दृष्टिकोण**


ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह भारतीय दर्शन और नीति का प्रतीक बन गया। यह संदेश था कि भारत अब चुप नहीं बैठेगा। हम आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कदम उठाएंगे, लेकिन न्यायपूर्ण तरीके से। भारतीय सेना ने यह साबित कर दिया कि किसी भी राष्ट्र को अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार है, बशर्ते वह न्याय और धर्म के सिद्धांतों का पालन करे।


राजनाथ सिंह ने हनुमान जी की नीति का उदाहरण देकर भारतीय सैन्य कार्रवाई को धार्मिक दृष्टिकोण से जोड़ा, जिससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारतीय सेना की कार्रवाइयां केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि नैतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से भी सही हैं। इस दौरान, भारतीय सेना ने अपने उद्देश्य को पूरी तरह से स्पष्ट किया, कि वे आतंकवाद को नष्ट करने के लिए हैं, लेकिन किसी भी निर्दोष नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते।


**ऑपरेशन सिंदूर और भारतीय रक्षा नीति**


ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय रक्षा नीति को और अधिक मजबूत किया है। यह दिखाता है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ पूरी तरह से एकजुट है और इस नीति में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। भारतीय सेना ने यह सिद्ध कर दिया कि वे आतंकवादियों को उनके ठिकानों तक जाकर मार सकते हैं, लेकिन वे किसी भी निर्दोष नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। यह ऑपरेशन भारत की सैन्य शक्ति का एक बेहतरीन उदाहरण बन गया है, जो दुनिया को यह संदेश देता है कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।


**निष्कर्ष**


ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य मिशन नहीं था, बल्कि यह एक संदेश था, जो पूरी दुनिया में फैल गया। यह संदेश था कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, लेकिन यह सुनिश्चित करता है कि वह किसी भी निर्दोष को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। जैसा कि हनुमान जी ने कहा था, "जिन्ह मोहि मारा, ते मैं मारे", भारत ने भी उन्हीं को निशाना बनाया, जिन्होंने भारतीय नागरिकों और सैनिकों पर हमला किया। इस प्रकार, ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य नीति और उसकी रणनीति को नए आयाम पर स्थापित किया है।

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