ऑपरेशन सिंदूर:करगिल के शहीदों का बदला लेकर भारत ने दिखाया नया तेवर
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**ऑपरेशन सिंदूर: जब भारत ने करगिल के शहीदों का बदला लेकर देश को दिलाया सुकून**
*लेखिका: राधा राणा*
भारत जब भी घायल होता है, तो वह चुप नहीं बैठता—बल्कि ऐसा जवाब देता है कि दुश्मन की कई पीढ़ियों को सबक मिल जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ है ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए, जिसने ना सिर्फ आतंक के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई को दिखाया, बल्कि उन शहीद परिवारों के जख्मों पर भी मरहम लगाया, जो दशकों से अपने बेटों की शहादत को न्याय मिलने की प्रतीक्षा कर रहे थे।
1999 के कारगिल युद्ध को भले ही दो दशक से ज्यादा हो गए हों, लेकिन मुजफ्फरपुर जैसे शहरों में शहीद परिवारों का दर्द आज भी वैसा ही ताजा है। ऐसे में जब ऑपरेशन सिंदूर की खबर सामने आई, तो यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं रही—यह न्याय का प्रतीक बन गई। शहीद सुनील कुमार की पत्नी मीना देवी ने जब कहा, *"मेरा सिंदूर मिटाने वालों से बदला ले लिया गया,"* तो हर देशवासी की आंखें भर आईं। उनका यह कहना सिर्फ एक व्यक्तिगत भावना नहीं थी, बल्कि हर उस सैनिक की पत्नी की आवाज़ थी, जिसने देश के लिए अपना सब कुछ खो दिया।
84 वर्षीय दौलती देवी, जिनके बेटे प्रमोद की शहादत के बाद उनके शव को 38 दिन बाद बर्फ से निकाला गया था, उन्होंने भावुक होकर कहा कि आज उनका बेटा जहां कहीं भी होगा, *"भारत माता की जय"* बोल रहा होगा। यह वाक्य देश के उन तमाम नागरिकों की भावना को दर्शाता है, जो वर्षों से यह उम्मीद लगाए बैठे थे कि पाकिस्तान को उसके किए की सज़ा जरूर मिलेगी।
ऑपरेशन सिंदूर केवल एक बदले की कहानी नहीं है, यह भारत की बदलती रणनीति और आत्मनिर्भर सैन्य शक्ति का उदाहरण भी है। यह उस भारत की तस्वीर है, जो शांति चाहता है, लेकिन आत्मसम्मान के साथ। शहीद प्रमोद के भाई दिलीप कहते हैं, *"हम शांति चाहते हैं, लेकिन अगर कोई हमें परेशान करेगा, तो अब हम चुप नहीं बैठेंगे।"* यही भावना आज भारत की रणनीति का मूल है—*‘शांति के साथ शक्ति।’*
मुजफ्फरपुर की जनता ने जिस तरह से भारतीय सेना को खुलकर समर्थन दिया और यहां तक कहा कि *"अब तो पूरा पाकिस्तान चाहिए,"* यह जनता की पीड़ा और गुस्से का संकेत है। अब देश सिर्फ सहन करने वाला नहीं, जवाब देने वाला बन चुका है।
ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल दुश्मनों को करारा जवाब दिया, बल्कि देश की जनता में आत्मविश्वास और गर्व का भाव भी पैदा किया है। इस ऑपरेशन ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत अब सिर्फ सीमाओं की रक्षा करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि अब वह आतंक के गढ़ में घुसकर मारने की क्षमता और इच्छाशक्ति दोनों रखता है।
भारत की सेना ने एक बार फिर दुनिया को बताया है कि जब बात देश की सुरक्षा की हो, तो भारत किसी भी हद तक जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर जो भावनात्मक प्रतिक्रिया देशभर से आई है, वह यह साबित करती है कि हर भारतीय के दिल में शहीदों के प्रति सम्मान ज़िंदा है और बदले की यह भावना सिर्फ सेना की नहीं, बल्कि पूरे देश की थी।
आज जब हम अपने शहीदों को याद करते हैं, तो ऑपरेशन सिंदूर उनके लिए एक श्रद्धांजलि की तरह है—एक ऐसा अभियान, जो उनके बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देता।
**जय हिंद!**
**लेखिका – राधा राणा**
*(यह लेख भावनात्मक श्रद्धांजलि है उन शहीदों के नाम, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।)*
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