दलितों को भड़काने का काम कर रहे हैं Tejashwi Yadav! Jitan Ram Manjhi ने कसा तंज!

दलितों को भड़काने का काम कर रहे हैं Tejashwi Yadav! Jitan Ram Manjhi ने कसा तंज!


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बिहार की सियासत में एक बार फिर गर्मी लौट आई है, और इस बार वजह है नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की वो भावुक और सधी हुई हुंकार, जिसने मुसहर-भुइयां समाज को सीधे तौर पर सत्ता के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है। मंगलवार को पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में राजद द्वारा आयोजित ‘मुसहर-भुइयां महारैली सह संवाद’ कार्यक्रम में तेजस्वी यादव ने खुद को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करते हुए ऐसे वादों की झड़ी लगा दी, जिनकी गूंज अगले चुनावी समर तक बनी रह सकती है।


तेजस्वी ने मंच से कहा, *“आपका बेटा मुख्यमंत्री बनेगा तो झुग्गी वालों पर लाठियां नहीं चलेंगी, कच्चे मकान टूटेंगे नहीं, बल्कि पक्के मकान दिए जाएंगे।”* उनके इस भावनात्मक अपील ने सभा में बैठे हजारों लोगों को सीधे जोड़ लिया। उन्होंने वादा किया कि अगर महागठबंधन की सरकार बनी तो माताओं-बहनों को हर महीने ढाई हजार रुपये बैंक खाते में दिए जाएंगे, वृद्धा और दिव्यांग पेंशन में वृद्धि होगी और 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जाएगी।


तेजस्वी यादव की इस घोषणा को जहां सामाजिक न्याय के एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं विरोधी दलों ने इसे दलितों को बरगलाने की सियासी चाल बताया है। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया पर तीखा तंज कसते हुए लिखा, *“सुना है, मुसहर सम्मेलन के बाद तेजस्वी यादव राजद का राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी मुसहर जाति के नेता को बना देंगे और पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा कब्जाई गई मुसहरों की जमीन भी लौटाई जाएगी।”* उनके इस कटाक्ष ने राजद के अंदरूनी व बाहरी दोनों हलकों में हलचल मचा दी है।


तेजस्वी ने अपने भाषण में जातीय गणना के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि अनुसूचित जातियों की आबादी बिहार में 21.3 फीसदी है, लेकिन इनमें केवल 1.3 फीसदी के पास ही सरकारी नौकरी है, और इंजीनियर की बात करें तो केवल 0.015 फीसदी ही इस पद तक पहुंच पाए हैं। यह आंकड़े सुनाकर तेजस्वी ने यह दिखाने की कोशिश की कि सामाजिक न्याय अब भी अधूरा है, और राजद उसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।


कार्यक्रम में उन्होंने पढ़ाई-लिखाई पर भी जोर देते हुए कहा, *“अगर आप शिक्षित नहीं होंगे, तो लोग आपके साथ अन्याय करते रहेंगे।”* उन्होंने यह भी कहा कि राजद की सरकार बनने पर कमजोर वर्गों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की गारंटी मिलेगी।


वहीं, लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन ने भी तेजस्वी यादव पर पलटवार करते हुए कहा, *“अगर राजद को मुसहर-भुइयां की इतनी चिंता है, तो किसी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा क्यों नहीं घोषित कर देते? ये समाज अब मोहरा नहीं, बराबरी चाहता है।”*


राजद की यह महारैली एक ओर जहां राजनीतिक संदेशों से भरी रही, वहीं यह भी साफ कर गई कि बिहार की राजनीति अब फिर से जातीय और सामाजिक समीकरणों की नई करवट लेने वाली है। तेजस्वी यादव ने खुद को मुख्यमंत्री पद के लिए जनता के समक्ष पेश कर दिया है, अब देखना होगा कि उनकी यह रणनीति उन्हें सत्ता तक पहुंचा पाती है या विरोधियों के कटाक्षों और सवालों में उलझकर रह जाती है।


फिलहाल, तेजस्वी यादव की यह हुंकार बिहार की चुनावी बिसात पर एक बड़ा दांव है—जिसका असर आने वाले महीनों में साफ दिखेगा।

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