इंदिरा युग की वापसी! Rahul Gandhi ने बदला कांग्रेस में टिकट बंटवारे का फॉर्मूला | Bihar Congress
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**कांग्रेस में इंदिरा गांधी के दौर की वापसी होती दिख रही है।** पार्टी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर संगठन को जमीनी स्तर से मज़बूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अब प्रत्याशियों का चयन आलाकमान की बजाय ज़मीनी नेताओं की सिफारिशों के आधार पर किया जाएगा। इस बदलाव के तहत राहुल गांधी ने इंदिरा गांधी के समय में इस्तेमाल होने वाले टिकट बंटवारे के फॉर्मूले को अपनाने का ऐलान किया है।
राहुल गांधी ने दिल्ली में बिहार के नवनियुक्त कांग्रेस जिलाध्यक्षों के साथ बैठक कर यह निर्णय साझा किया। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद रहे। राहुल ने बताया कि इंदिरा गांधी के कार्यकाल में उम्मीदवारों के चयन की जिम्मेदारी जिलाध्यक्षों की हुआ करती थी, लेकिन बाद में यह ताकत धीरे-धीरे प्रदेश अध्यक्षों और फिर एआईसीसी तक सीमित हो गई। अब फिर से वही पुराना फॉर्मूला लागू किया जाएगा, जिसमें जिलाध्यक्षों की भूमिका सबसे अहम होगी।
राहुल गांधी के इस निर्णय के अनुसार, अब हर महीने जिलाध्यक्षों की बैठक आयोजित होगी और उसमें उम्मीदवारों पर चर्चा की जाएगी। इन बैठकों में पार्टी के विधायक, पूर्व विधायक, सांसद, एमएलसी और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी अनिवार्य होगी। इतना ही नहीं, इन बैठकों में लिए गए फैसलों की रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी को भेजनी होगी।
इस पूरे प्रक्रिया का एकमात्र उद्देश्य है कि कांग्रेस जमीनी स्तर पर फिर से मज़बूत हो और कार्यकर्ताओं का भरोसा संगठन पर लौटे। राहुल गांधी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि प्रत्याशियों का चयन केवल लोकप्रियता या दिल्ली से तय नहीं होगा, बल्कि स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय को प्राथमिकता दी जाएगी। यह सिस्टम बिहार से शुरू होगा, और अगर सफल रहा तो इसे अन्य राज्यों में भी लागू किया जाएगा।
कांग्रेस सूत्रों की मानें तो जिलाध्यक्षों को आगामी छह महीनों के भीतर प्रखंड, बूथ और वार्ड स्तर तक कमेटियां गठित करनी होंगी। यदि वे इस काम में असफल रहते हैं, तो उन्हें पद से हटा दिया जाएगा। यह बदलाव एक तरह से कांग्रेस के लिए परीक्षा की घड़ी भी है, जिसमें यह देखा जाएगा कि पार्टी वाकई में जमीनी स्तर पर दोबारा मजबूत होने के लिए कितनी तैयार है।
राहुल गांधी की यह रणनीति न केवल संगठन को मजबूती देने की कोशिश है, बल्कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने का प्रयास भी है कि अब उनकी बात सुनी जाएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में यह नया फॉर्मूला कितना असर दिखा पाता है, और क्या यह कांग्रेस को फिर से पुराने दिनों की तरह मजबूती दिला पाएगा।
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