वक्फ बिल पर Nitish Kumar की खामोशी बनी चर्चा का विषय
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**वक्फ बिल पर नीतीश की खामोशी बनी चर्चा का विषय — हाथ जोड़ा, मुस्कुराए और निकल गए**
पटना में शनिवार को एक राजनीतिक दृश्य ने सबका ध्यान खींचा, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वक्फ बिल पर पूछे गए सवाल का जवाब एक शब्द कहे बिना ही दे दिया। बाबू जगजीवन राम की जयंती समारोह में भाग लेने पहुंचे नीतीश कुमार से जैसे ही मीडिया ने वक्फ बिल पर सवाल पूछा, उन्होंने सिर्फ हाथ जोड़ा, हल्की मुस्कान दी और बिना कुछ बोले आगे बढ़ गए। उनके इस शांत और सौम्य अंदाज़ ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया वक्फ बिल इस समय बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बना हुआ है। जेडीयू के कई मुस्लिम नेताओं ने पार्टी के इस बिल को समर्थन देने पर नाराज़गी जताते हुए इस्तीफा तक दे दिया है। दूसरी ओर, विपक्षी पार्टी राजद ने इसे मुसलमानों से विश्वासघात बताते हुए जेडीयू पर हमला तेज कर दिया है।
हालांकि, जेडीयू के कुछ वरिष्ठ नेता जैसे ललन सिंह, विजय कुमार चौधरी, जमा खान और खालिद अनवर इस बिल को उचित ठहरा रहे हैं और नीतीश कुमार के फैसले के साथ खड़े नज़र आ रहे हैं। लेकिन नीतीश कुमार की इस चुप्पी ने सभी को हैरान कर दिया है।
बाबू जगजीवन राम की जयंती पर आयोजित इस समारोह में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा, सम्राट चौधरी और कई अन्य प्रमुख नेता मौजूद थे। जब नीतीश कुमार श्रद्धांजलि देने के बाद मीडिया से मुख़ातिब हुए, तो पत्रकारों ने वक्फ बिल पर सवाल दागा। लेकिन उन्होंने सवाल को बड़े धैर्य से सुना, कुछ बोले बिना हल्के से मुस्कुराए और हाथ जोड़कर वहां से आगे बढ़ गए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह रुख रणनीतिक हो सकता है। चुप रहकर वो किसी भी तरह की सीधी बयानबाज़ी से बचना चाह रहे हैं, जिससे पार्टी की छवि पर असर न पड़े और गठबंधन में दरार भी न आए।
नीतीश कुमार की यह चुप्पी क्या आने वाले दिनों में कोई बड़ा संकेत दे रही है? क्या यह एक सोची-समझी रणनीति है या फिर दबाव में उठाया गया कदम? इन सवालों के जवाब तो आने वाला वक्त ही देगा, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि वक्फ बिल पर मुख्यमंत्री की चुप्पी और मुस्कुराहट दोनों ही चर्चाओं का विषय बन चुके हैं।
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