संपत्ति या सियासत? पासवान परिवार में दरार क्यों गहराई? | Chirag Paswan | Pasupati Paras
YouTube video link....https://youtu.be/pXN1JAeLiw0
**क्या पासवान परिवार में संपत्ति की जंग तोड़ देगी राजनीतिक विरासत?**
बिहार की राजनीति में कभी एकजुट दिखने वाला पासवान परिवार आज गहरे विवादों में घिरा है। संपत्ति को लेकर शुरू हुआ झगड़ा अब मीडिया की सुर्खियों और राजनीतिक बहसों का हिस्सा बन गया है। लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के संस्थापक और दिवंगत नेता रामविलास पासवान के निधन के बाद परिवार में जो दरार दिखी थी, अब वो दरार एक खुला संघर्ष बन चुकी है। ताज़ा मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने अपने भतीजे और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से साफ शब्दों में खगड़िया से दिल्ली तक प्रॉपर्टी के बंटवारे की मांग कर दी है।
इस विवाद ने तब और तूल पकड़ा जब पारस ने ये आरोप लगाया कि चिराग पासवान ने उनके भाई यानी रामविलास जी के सपनों को तोड़ा है। संसद में वक्फ बिल पर लोजपा (रामविलास) के समर्थन को लेकर पारस ने चिराग के फैसलों पर सवाल उठाए और कहा कि ये राजनीतिक नहीं, बल्कि पारिवारिक आदर्शों से ग़द्दारी जैसा है।
लेकिन मामला सिर्फ राजनीतिक मतभेद तक सीमित नहीं है। बीते दिनों चिराग पासवान की बड़ी मां, राजकुमारी देवी ने पशुपति पारस की पत्नी शोभा देवी और रामचंद्र पासवान की पत्नी सुनैना देवी पर एफआईआर दर्ज करवाई। आरोप है कि इन दोनों ने मिलकर उन्हें संपत्ति से बेदखल करने की कोशिश की। ये एफआईआर संपत्ति विवाद की एक और परत खोलती है, जो परिवार के अंदरूनी तनाव को सार्वजनिक कर देती है।
इस बीच चिराग पासवान खुद अपनी बड़ी मां से मिलने उनके पैतृक गांव पहुंचे। इस मुलाकात को उन्होंने भावनात्मक बताया लेकिन साथ ही उन्होंने अपने चाचा पर गंभीर आरोप भी लगाए। चिराग का कहना है कि पारस ने कई संपत्तियां छुपा रखी हैं, जिनकी जानकारी उन्होंने कभी साझा नहीं की। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पारस वाकई बंटवारे के पक्ष में हैं तो सबसे पहले उन्हें अपनी संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
वहीं पारस ने दरभंगा में मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि राजकुमारी देवी से जो एफआईआर दर्ज कराई गई है, वो किसी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि राजकुमारी देवी पढ़ी-लिखी नहीं हैं और उनकी शिकायत में अंगूठा लगा हुआ है, ऐसे में जांच होनी चाहिए कि वो अंगूठा किसने लगवाया।
अब सवाल यह उठता है कि क्या यह सिर्फ एक पारिवारिक संपत्ति विवाद है, या इसके पीछे गहरी राजनीतिक चालें भी छुपी हैं? क्या यह बंटवारा सचमुच सिर्फ पैतृक संपत्ति का है, या यह रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत का भी विभाजन बन चुका है?
पारस की मांग साफ है—उन्हें खगड़िया से दिल्ली तक का बंटवारा चाहिए। दूसरी ओर, चिराग की भी स्पष्ट शर्तें हैं—पहले पारस अपनी संपत्ति की जानकारी दें। यह एक ऐसा गतिरोध है, जहां न कोई झुकने को तैयार है और न ही पीछे हटने को।
पारिवारिक विवादों का असर राजनीति पर कितना होता है, यह भारतीय राजनीति में नया नहीं है। लेकिन पासवान परिवार का यह विवाद बिहार की राजनीति के साथ-साथ दिल्ली की सियासत को भी प्रभावित कर सकता है। खासकर तब, जब लोकसभा चुनाव धीरे-धीरे नज़दीक आ रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में जनता के मन में कई सवाल उठ रहे हैं—
क्या यह विवाद सुलझ पाएगा?
क्या यह सिर्फ संपत्ति की लड़ाई है या सियासी वर्चस्व की भी जंग है?
क्या रामविलास पासवान के बनाए राजनीतिक किले को उनके अपने ही वारिस ढहा देंगे?
इन सभी सवालों का जवाब वक्त देगा, लेकिन इतना तय है कि यह विवाद सिर्फ घर की दीवारों तक सीमित नहीं रहा, अब यह एक सार्वजनिक बहस बन चुका है, जो लंबे समय तक चर्चा में बना रहेगा।
---
0 Response to "संपत्ति या सियासत? पासवान परिवार में दरार क्यों गहराई? | Chirag Paswan | Pasupati Paras "
एक टिप्पणी भेजें