ओबीसी, दलित और मुस्लिम वोटों पर कांग्रेस की नजर, लालू-तेजस्वी की बढ़ी मुश्किलें !
YouTube video link....https://youtu.be/jy8FZaanQt4
बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सियासी हलचल तेज़ हो गई है। इस बार कांग्रेस पार्टी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए खास तौर पर ओबीसी, दलित और मुस्लिम वोट बैंक पर फोकस करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस अब मान चुकी है कि सवर्ण वोटों पर भरोसा करना उसकी बड़ी गलती होगी, क्योंकि ये वर्ग बीजेपी के साथ पूरी तरह से जुड़ चुका है। ऐसे में कांग्रेस ने अब अपना पूरा ध्यान उन वोटरों पर लगा दिया है जो लंबे वक्त से क्षेत्रीय दलों का सहारा बने हुए हैं। खासकर बिहार में लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी से कांग्रेस की सीधी टक्कर की तैयारी दिख रही है।
कांग्रेस ने हाल ही में अहमदाबाद में हुए अधिवेशन के दौरान साफ कर दिया कि अब वह दलित, ओबीसी और मुस्लिम समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाएगी। पार्टी सत्ता में आने पर एससी-एसटी उपयोजना के लिए केंद्रीय कानून बनाने की बात कह रही है, जिससे इन वर्गों को उनके हिस्से के बजट का पूरा लाभ मिल सके। इसके साथ ही जातिगत जनगणना कराकर सामाजिक न्याय की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने का इरादा भी साफ हो चुका है।
हालांकि सवाल ये है कि जब कांग्रेस ने देश में सबसे लंबे समय तक राज किया, तब यह कदम क्यों नहीं उठाए? अब जब पार्टी सत्ता से बाहर है और कई राज्यों में उसकी स्थिति कमजोर हो चुकी है, तो इस तरह की घोषणाएं जनता के बीच कितनी असरदार साबित होंगी, ये देखना दिलचस्प होगा।
मुस्लिम वोट बैंक की बात करें तो यह कोई छुपी बात नहीं है कि पिछले कुछ सालों में मुस्लिम समाज का कांग्रेस से मोहभंग हो चुका है। पहले आरिफ मोहम्मद खान और गुलाम नबी आज़ाद जैसे दिग्गज नेताओं की अनदेखी, फिर कांग्रेस शासन के दौरान हुए दंगों ने इस वोट बैंक को कांग्रेस से दूर कर दिया। आज बिहार में मुसलमानों का एक बड़ा हिस्सा आरजेडी के साथ खड़ा है, जबकि यूपी में समाजवादी पार्टी ने इस वर्ग का भरोसा जीता है। ऐसे में कांग्रेस के लिए इस वोट बैंक को फिर से अपनी ओर मोड़ना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
ओबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग का मुद्दा भी कांग्रेस की रणनीति का अहम हिस्सा है। जाति जनगणना का वादा कर कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह पिछड़े वर्ग की राजनीति में दोबारा जगह बनाना चाहती है। लेकिन यहां भी क्षेत्रीय दलों का वर्चस्व कांग्रेस के लिए दीवार बना हुआ है। बिहार में यादव समाज का भरोसा आज भी लालू यादव की पार्टी आरजेडी पर टिका हुआ है, तो यूपी में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी इस वर्ग की पहली पसंद है।
कांग्रेस की ये कोशिश उसकी 'एकला चलो' नीति का हिस्सा लगती है, यानी पार्टी अब गठबंधन पर कम और अपनी स्वतंत्र सियासी जमीन पर ज्यादा भरोसा दिखा रही है। लेकिन राजनीति में आज के दौर में गठबंधन के बिना मजबूत वापसी करना किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं है। खुद बीजेपी भी केंद्र और राज्यों में सहयोगी दलों के सहारे सरकार बनाती रही है। ऐसे में कांग्रेस का अकेले अपनी किस्मत आजमाना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
बिहार चुनाव 2025 में कांग्रेस की ये नई रणनीति लालू और तेजस्वी के लिए वाकई चिंता की वजह बन सकती है। लेकिन कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या वह उन वोटरों का भरोसा दोबारा जीत पाएगी, जिन्होंने उसे सालों पहले ठुकरा दिया था। बिहार की राजनीति में कांग्रेस की यह नई चाल क्या रंग लाएगी — इसका जवाब तो चुनाव नतीजे ही देंगे।
0 Response to "ओबीसी, दलित और मुस्लिम वोटों पर कांग्रेस की नजर, लालू-तेजस्वी की बढ़ी मुश्किलें !"
एक टिप्पणी भेजें