संजीव मुखिया के सॉल्वर गैंग में डॉक्टरों की मिलीभगत

संजीव मुखिया के सॉल्वर गैंग में डॉक्टरों की मिलीभगत


 YouTube video link....https://youtu.be/Hy5KydNypgY

**संजीव मुखिया के सॉल्वर गैंग में डॉक्टरों की मिलीभगत, EOU की पूछताछ में सनसनीखेज खुलासा**

नीट-यूजी और सिपाही भर्ती समेत कई बड़ी परीक्षाओं में पेपर लीक कराने वाला मास्टरमाइंड संजीव मुखिया एक बार फिर सुर्खियों में है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की पूछताछ में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि संजीव मुखिया के सॉल्वर गैंग में राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में कार्यरत कई डॉक्टर भी शामिल थे। इन डॉक्टरों को परीक्षा के दौरान असली अभ्यर्थियों की जगह डमी के तौर पर बिठाया जाता था और इसके बदले उन्हें पांच से छह लाख रुपये तक की मोटी रकम दी जाती थी।

सूत्रों के मुताबिक, संजीव मुखिया का यह नेटवर्क न केवल बिहार बल्कि दूसरे राज्यों में भी फैला हुआ था। परीक्षा केंद्रों को भी प्रबंधन के जरिये प्रभावित किया जाता था ताकि सॉल्वर आराम से परीक्षा दे सकें। सोमवार को न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद EOU ने संजीव मुखिया को दो दिन की और रिमांड पर लिया। मंगलवार को पूरे दिन पूछताछ के बाद बुधवार दोपहर बाद उसे जेल भेजा जाएगा।

पूछताछ के दौरान EOU अधिकारियों ने संजीव मुखिया से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे, जैसे कि उसने दूसरे राज्यों में पेपर लीक का नेटवर्क कैसे खड़ा किया, किन-किन लोगों को शामिल किया, और बिहार में हुई घटनाओं में उसकी भूमिका क्या रही। कोलकाता के प्रिंटिंग प्रेस से सिपाही बहाली परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक कराने के सवाल पर शुरुआत में संजीव मुखिया ने टालमटोल करने की कोशिश की, लेकिन जब उसे पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक सबूत दिखाए गए, तो वह सच्चाई स्वीकारने पर मजबूर हो गया।

इस बीच, पटना स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में दिल्ली से आई सीबीआई टीम ने संजीव मुखिया की रिमांड के लिए आवेदन दिया है। अदालत ने प्रोडक्शन वारंट जारी कर दिया है। गौरतलब है कि नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले में शास्त्रीनगर थाना, पटना में एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में इस केस की जांच आर्थिक अपराध इकाई और फिर सीबीआई ने संभाली। अब तक इस मामले में 45 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और जांच जारी है।


पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि फरारी के दौरान संजीव मुखिया बिहार और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में छिपता रहा था। उसकी योजना अपनी पत्नी को राजनीति में लाने की भी थी। फिलहाल EOU संजीव मुखिया के अंतरराज्यीय नेटवर्क और उससे जुड़े डॉक्टरों की भूमिका को गहराई से खंगाल रही है। राज्य सरकार ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए परीक्षा प्रणाली में सुधार के संकेत दिए हैं।


संजीव मुखिया केस ने एक बार फिर देश में परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।


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