फिर एक्शन में केके पाठक: फर्जी जमाबंदी पर सख्ती
YouTube video link....https://youtu.be/61XFDclg_90
**फिर एक्शन में लौटे केके पाठक: फर्जी जमाबंदी पर कसा शिकंजा, 15 दिन में भुगतान वरना वारंट**
बिहार के चर्चित अधिकारी और राजस्व पर्षद के अध्यक्ष केके पाठक एक बार फिर अपने पुराने रौद्र रूप में लौट आए हैं। वर्षों से अपनी तेज़तर्रार कार्यशैली और कड़क फैसलों के लिए पहचाने जाने वाले केके पाठक ने अब एक बार फिर राज्य के राजस्व तंत्र को हिला कर रख दिया है। इस बार उनका निशाना है फर्जी जमाबंदी और बकाएदार ज़मीन मालिक।
**बड़हरा अंचल में फर्जी जमाबंदी पर सीधी कार्रवाई**
केके पाठक ने भोजपुर जिले के बड़हरा अंचल में सरकारी जमीन पर की गई 349 फर्जी जमाबंदियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अब किसी भी हालत में फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ये आदेश केवल बड़हरा तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि पूरे राज्य में लागू किए जाएंगे।
**15 हजार से अधिक वाद लंबित, 440 करोड़ की बकाया राशि**
समीक्षा बैठक में यह जानकारी सामने आई कि जिले के न्यायालयों में 15,552 नीलाम पत्र वाद लंबित हैं, जिनसे जुड़ी कुल राशि 440.07 करोड़ रुपये है। इनमें से अब तक 13,277 मामलों में भारतीय भू-राजस्व संहिता की धारा 7 के तहत नोटिस जारी किए जा चुके हैं। केके पाठक ने सभी शेष वादों में जल्द से जल्द नोटिस जारी करने और 15 दिन के भीतर भुगतान न होने पर बॉडी वारंट जारी करने के निर्देश दिए हैं।
**सख्त चेतावनी: वारंट के जरिए गिरफ्तारी की तैयारी**
केके पाठक ने एसपी को आदेश दिया है कि डीएसपी (मुख्यालय) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मिलकर इन वादों में जारी किए गए वारंट का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। जिन पर बकाया है, उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा। फरवरी और मार्च में किए गए निष्पादन से अब तक लगभग 32 करोड़ रुपये की वसूली भी हो चुकी है।
**अभिलेखागार में सुधार के निर्देश**
केके पाठक ने जिला अभिलेखागार कार्यालय का निरीक्षण करते हुए साफ-सफाई में सुधार, स्कैनिंग प्रक्रिया को तेज करने और मेटा डाटा इंट्री को अनिवार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर दस्तावेज़ में खाताधारी का नाम अवश्य हो ताकि आम नागरिक ऑनलाइन पोर्टल पर आसानी से अपने कागज़ात खोज सकें।
**एक सिस्टमेटिक सुधार की पहल**
इस पूरी कार्यवाही के दौरान अपर सदस्य सफीना एएन, दयानिधान पांडेय, सचिव गिरिवर दयाल सिंह, डीएम तनय सुल्तानिया, एसपी राज समेत कई उच्चाधिकारी मौजूद रहे। यह दिखाता है कि यह सिर्फ एक अफसर का प्रयास नहीं बल्कि पूरे सिस्टम को सुधारने की एक संगठित कोशिश है।
**निष्कर्ष**
केके पाठक की यह कार्रवाईकेवल अधिकारियों के बीच ही नहीं, बल्कि जनता के बीच भी चर्चा का विषय बन चुकी है। उनके सख्त रुख से यह संदेश साफ है कि अब लापरवाही और फर्जीवाड़ा नहीं चलेगा। आने वाले दिनों में देखना होगा कि ये सख्ती ज़मीनी स्तर पर कितना असर दिखाती है और क्या इससे बिहार की राजस्व व्यवस्था में वाकई सुधार आता है या नहीं।
फिलहाल इतना तय है कि केके पाठक की वापसी ने एक बार फिर सरकारी तंत्र को अलर्ट मोड में ला दिया है।
0 Response to "फिर एक्शन में केके पाठक: फर्जी जमाबंदी पर सख्ती"
एक टिप्पणी भेजें