"खान सर पर छात्रों को गुमराह करने और राजनीति में घसीटने के गंभीर आरोप, छात्र नेता ने खोला बड़ा राज!"

"खान सर पर छात्रों को गुमराह करने और राजनीति में घसीटने के गंभीर आरोप, छात्र नेता ने खोला बड़ा राज!"


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**खान सर पर छात्रों को गुमराह करने और राजनीति में घसीटने के गंभीर आरोप, छात्र नेता ने खोला बड़ा राज!**

बिहार लोकसेवा आयोग (BPSC) की 70वीं पीटी परीक्षा को रद्द करने के बाद छात्रों का आंदोलन देश भर में चर्चा का विषय बन गया था। इस आंदोलन में बिहार के प्रसिद्ध कोचिंग टीचर खान सर का नाम प्रमुख रूप से सामने आया था, जिन्होंने छात्रों के अधिकारों की लड़ाई में खुलकर समर्थन किया था। लेकिन अब इस आंदोलन में नया मोड़ आ चुका है, और खान सर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जो न सिर्फ छात्रों के संघर्ष को संदिग्ध बना रहे हैं, बल्कि इसके राजनीतिकरण और गुमराह करने का भी आरोप है।

छात्र नेता दिलीप कुमार ने खान सर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने बीपीएससी के इस आंदोलन को गुमराह किया और इसके जरिए राजनीति की रोटियां सेंकी। दिलीप कुमार का कहना है कि खान सर ने जो सबूतों का दावा किया था, उन्हें न तो कोर्ट में पेश किया और न ही जांच एजेंसियों के पास भेजे। ये सबूत कुछ ऐसे थे, जिनका दावा था कि एक हजार करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था, लेकिन वे सबूत कहीं दिखाई नहीं दिए।

दिलीप कुमार ने यह भी कहा कि खान सर और उनके सहयोगियों ने इस आंदोलन को राजनीतिक रंग देने के लिए कई कोचिंग माफियाओं का साथ लिया। जब कोर्ट में याचिका दायर की गई, तो जानबूझकर उन सबूतों को पेश नहीं किया गया, जिनका पहले सार्वजनिक रूप से दावा किया गया था। परिणामस्वरूप, पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में सभी याचिकाओं को सबूतों की कमी के कारण खारिज कर दिया और बीपीएससी को मेन्स परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया।

इस मामले में दिलीप कुमार ने और भी सनसनीखेज आरोप लगाए। उनका कहना था कि खान सर और कोचिंग संचालकों ने गुप्त मीटिंग्स कीं और यह धमकी दी थी कि अगर री-एग्जाम नहीं हुआ, तो वे सभी सबूत उजागर करेंगे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और छात्रों को न्याय नहीं मिला। दिलीप ने यह भी कहा कि खान सर ने कुछ कोचिंग माफियाओं के साथ मिलकर इस आंदोलन का फायदा उठाया, ताकि पेपर लीक मामले की जांच में कोई कार्रवाई न हो सके।

इसके अलावा, दिलीप ने यह भी खुलासा किया कि बिहार के कई जिलों, जैसे दरभंगा, समस्तीपुर और मधुबनी में भी कोचिंग माफियाओं पर पेपर सेटिंग और परीक्षा में धांधली के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन इन माफियाओं के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। दिलीप का आरोप है कि खान सर को अब अपनी तरफ से वह एक हजार करोड़ रुपये के लेन-देन से जुड़े डाटा को सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और छात्रों को न्याय मिल सके।

यह पूरा विवाद सिर्फ बीपीएससी परीक्षा से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह देशभर के शिक्षा तंत्र में फैली हुई धांधलियों का एक उदाहरण बन गया है। कोचिंग माफिया और परीक्षा प्रणाली में हो रही धांधलियां छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल रही हैं, और अगर इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पूरी तरह से खतरे में पड़ जाएगी।


इस मामले ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या हमारे कोचिंग संस्थान और शिक्षा तंत्र इस तरह के भ्रष्टाचार और धांधलियों को रोकने में सक्षम हैं? क्या छात्रों के संघर्ष को सही दिशा में मोड़ा जा सकता है, या फिर इसे राजनीतिक हथकंडों का हिस्सा बना दिया जाएगा?

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