वक्फ बिल पर गरजे पशुपति पारस: बोले- चिराग फिल्मी हीरो, पर्दे के पीछे निभाते हैं अलग रोल
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**वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर गरजे पशुपति पारस, चिराग पासवान पर भी साधा निशाना**
बिहार की राजनीति इन दिनों फिर गरमा गई है। राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति नाथ पारस ने एक बार फिर अपने तीखे बयानों से सियासी हलचल बढ़ा दी है। सिकंदरा (जमुई) में आयोजित एक विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान उन्होंने न केवल केंद्र सरकार पर हमला बोला, बल्कि वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। यही नहीं, उन्होंने अपने भतीजे चिराग पासवान और भाभी राजकुमारी देवी को लेकर भी खुलकर बयान दिया, जिससे पारिवारिक मतभेद एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं।
पारस ने अपने भाषण की शुरुआत पार्टी की तैयारियों से की। उन्होंने बताया कि रालोजपा बिहार के सभी 243 विधानसभा सीटों पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। इसके लिए राज्यभर में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं और पार्टी का सदस्यता अभियान भी जोरों पर है। उन्होंने कहा कि पार्टी इंटरनल सर्वे के ज़रिए यह तय करेगी कि किन सीटों पर प्रत्याशी उतारे जाएं।
**वक्फ संशोधन विधेयक पर तीखा हमला**
पत्रकारों से बातचीत में पारस ने वक्फ संशोधन विधेयक को देश को बांटने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा को लोकसभा में 400 सीटें मिल जातीं, तो शायद संविधान तक बदल दिया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि अब जब वैसी स्थिति नहीं बनी, तो समाज में उन्माद फैलाने के लिए ऐसे विधेयक लाए जा रहे हैं। पारस ने कहा कि राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी शुरू से इस विधेयक के खिलाफ रही है और आगे भी इसका विरोध करती रहेगी।
**चिराग पासवान को बताया 'फिल्मी हीरो'**
पारिवारिक विवादों को लेकर पूछे गए सवाल पर पारस ने चुनावी मतभेद की बात कही, लेकिन चिराग पासवान पर हमला करने से नहीं चूके। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चिराग 'फिल्मी हीरो' हैं, जो पर्दे पर कुछ और दिखाते हैं और पर्दे के पीछे कुछ और भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जो चिराग अपनी बड़ी मां और 'राजमाता' कहकर पुकारते हैं, उन्होंने उन्हें रामविलास पासवान के अंतिम दर्शन तक क्यों नहीं करने दिया?
**संगठन को मज़बूत करने का आह्वान**
कार्यक्रम के अंत में पारस ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे एकजुट होकर पार्टी को मजबूती दें। उन्होंने कहा कि अब समय बयान देने का नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर ज़मीनी मुद्दों पर काम करने का है। कार्यक्रम में उनके पुत्र यशराज पासवान, प्रदेश महासचिव केशव सिंह, उपाध्यक्ष महताब आलम, दलित सेना के जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर, प्रखंड अध्यक्ष राजीव कुमार और दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
**निष्कर्ष**
पशुपति पारस के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की राजनीति में आगामी चुनाव से पहले पारिवारिक टकराव, विचारधारा और राजनीतिक रणनीतियां तीनों ही बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं। अब देखना यह होगा कि रालोजपा अपने संगठन को किस तरह मज़बूत करती है और इन आंतरिक विरोधों से ऊपर उठकर जनता का भरोसा जीतने में कितनी सफल होती है।
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