'सौगात ए मोदी' से क्या मुस्लिम वोट बैंक को साध रही बीजेपी ?

'सौगात ए मोदी' से क्या मुस्लिम वोट बैंक को साध रही बीजेपी ?


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बिहार में चुनावी साल के दौरान राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं, खासकर मुस्लिम मतदाताओं को साधने की होड़ में सियासी दल पूरी ताकत झोंक रहे हैं। केंद्र सरकार के वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को लेकर मुस्लिम संगठनों का विरोध जारी है, जिसे विपक्षी दलों का भी खुला समर्थन मिल रहा है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी इस विरोध के बीच मुसलमानों को साधने के लिए ईद से पहले ‘सौगात-ए-मोदी’ किट बांट रही है। राजधानी पटना में हाई कोर्ट मजार पर बीजेपी नेताओं ने गुरुवार को जरूरतमंद मुस्लिम महिलाओं और गरीबों के बीच यह किट वितरित किए।  


बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा इस अभियान को आगे बढ़ा रहा है, और पार्टी का लक्ष्य देशभर में 32 लाख गरीब मुस्लिमों तक यह किट पहुंचाने का है। इसकी शुरुआत बीते मंगलवार को दिल्ली से हुई, जिसके बाद अब इसे अन्य राज्यों में भी बांटा जा रहा है। पटना में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा नेता दानिश इकबाल के नेतृत्व में सौगात-ए-मोदी किट का वितरण किया गया, जिसमें खाने-पीने की चीजों के साथ कपड़े और ड्राई फ्रूट्स जैसी सामग्री शामिल थी। भाजपा नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक रूप से कमजोर मुस्लिम परिवार भी खुशी के साथ ईद मना सकें।  


वहीं, दूसरी ओर बिहार में वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समेत कई मुस्लिम संगठनों के नेतृत्व में इस बिल के खिलाफ पटना में एक बड़ा महाधरना आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। इस दौरान विपक्षी नेताओं ने मोदी सरकार पर मुस्लिम विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों को कमजोर करने की साजिश है।  


बिहार में इस साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं, और उससे पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका है। मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने की कोशिश में विपक्ष जहां केंद्र सरकार को वक्फ बिल को लेकर कठघरे में खड़ा कर रहा है, वहीं बीजेपी ‘सौगात-ए-मोदी’ किट के जरिए इस समुदाय तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा, जेडीयू, राजद, लोजपा समेत अन्य दल भी रमजान के महीने में इफ्तार पार्टियों के आयोजन के जरिए मुस्लिम समाज को अपने पाले में करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।  


बिहार की राजनीति में मुस्लिम मतदाता हमेशा से अहम भूमिका निभाते आए हैं और इस बार भी सभी राजनीतिक दल उन्हें अपने पक्ष में करने की पूरी कोशिश में जुटे हैं। वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पर उठे विवाद और बीजेपी के ‘सौगात-ए-मोदी’ अभियान के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक किस ओर रुख करता है।

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