नालंदा में नहीं मिली जगह, टला Rahul Gandhi का बिहार दौरा
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**राहुल गांधी का टला बिहार दौरा: EBC सम्मेलन के लिए कांग्रेस को नहीं मिली जगह, राजनीतिक साजिश या प्रशासनिक लापरवाही?**
बिहार की सियासी जमीन पर चुनावी हलचल तेज हो चुकी है। ऐसे में हर राजनीतिक दल अपनी रणनीति को धार देने में जुटा है। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी का प्रस्तावित बिहार दौरा अब टल गया है। 27 मई को राहुल गांधी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह ज़िले नालंदा में 'अत्यंत पिछड़ा वर्ग सम्मेलन' को संबोधित करने वाले थे, लेकिन कार्यक्रम स्थल की व्यवस्था न हो पाने के चलते यह दौरा फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
कांग्रेस ने नालंदा को सम्मेलन स्थल के रूप में इसलिए चुना था क्योंकि यह नीतीश कुमार का गृह ज़िला है और यहां जाकर कांग्रेस एक मजबूत सियासी संदेश देना चाहती थी। लेकिन अब जब सम्मेलन की तैयारी अधूरी रह गई, तो सवाल उठने लगे हैं—क्या यह केवल एक प्रशासनिक चूक थी या फिर किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा?
दरअसल, कांग्रेस इस वक्त बिहार में अपने खोए जनाधार को फिर से हासिल करने की कवायद में जुटी है। राज्य की करीब 36 प्रतिशत आबादी EBC यानी अत्यंत पिछड़े वर्ग की है और कांग्रेस इसी वर्ग को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस के लिए यह सम्मेलन एक अहम मौका था, लेकिन अब उसे आगे के लिए नई तारीख तय करनी पड़ेगी।
सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी जून के पहले सप्ताह में बिहार आ सकते हैं। इस बार कार्यक्रम के लिए हॉल की बुकिंग पहले ही सुनिश्चित की जाएगी ताकि दोबारा ऐसी स्थिति न बने। गौरतलब है कि इससे पहले भी राहुल गांधी 15 मई को दरभंगा दौरे पर आए थे, जहां उनके कार्यक्रम को लेकर प्रशासन से टकराव की स्थिति बन गई थी। राहुल गांधी ने प्रशासन पर अनुमति न देने का आरोप लगाया था, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक रंग लेने लगा था।
अब जबकि नालंदा सम्मेलन टल गया है, कांग्रेस ने इसे केवल आयोजन स्थल की कमी तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी के भीतर से आवाज़ें उठ रही हैं कि प्रशासन जानबूझकर कांग्रेस को कार्यक्रम नहीं करने दे रहा, जिससे जनता के बीच पार्टी की पहुंच सीमित रहे। यदि यह आरोप सच हैं, तो यह लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के सिद्धांतों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बिहार में सियासत कितनी संवेदनशील हो चुकी है और हर बड़ा कदम राजनीतिक मायनों में देखा जा रहा है। कांग्रेस अब इस स्थिति को एक मुद्दा बनाकर जनता के बीच जा सकती है और इसे अपनी रणनीति का हिस्सा बना सकती है।
फिलहाल राहुल गांधी का दौरा स्थगित जरूर हुआ है, लेकिन कांग्रेस की योजना थमी नहीं है। पार्टी अब नई तारीख और नए तेवर के साथ सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी में है। ऐसे में देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस इस घटना को कैसे भुनाती है और EBC वर्ग के बीच अपनी पैठ कितनी मज़बूत कर पाती है।
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