पाकिस्तान 'बिगड़ैल औलाद', सोफिया हमारी लक्ष्मीबाई: धीरेन्द्र शास्त्री का बयान वायरल
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**India-Pakistan Ceasefire पर जिग्नेश मेवाणी का बयान: अमेरिका की मध्यस्थता पर उठे सवाल, पीएम मोदी को घेरा**
भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर से सीजफायर उल्लंघन को लेकर सियासत तेज हो गई है। शनिवार को दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान ने सीमा पर गोलाबारी कर इसका उल्लंघन कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने भारत सरकार से तत्काल और सख्त प्रतिक्रिया की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।
जिग्नेश मेवाणी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि शिमला समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान के आपसी मामलों में किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए। ऐसे में अमेरिका की मध्यस्थता क्यों स्वीकार की जा रही है? उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है कि भारत जैसा संप्रभु देश किसी बाहरी ताकत की मध्यस्थता क्यों स्वीकार कर रहा है।
मेवाणी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो व्यक्ति खुद को 56 इंच का सीना बताता है, वह अमेरिका के सामने क्यों झुक रहा है? उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की विदेश नीति विफल साबित हो रही है, जहां एक ओर चीन भारत की सीमाओं पर अतिक्रमण करता है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान सीजफायर का उल्लंघन करता है, और भारत की सरकार केवल बयानबाजी तक सीमित रह जाती है।
इस बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सेना की कार्रवाई की सराहना की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से सेना ने सीमाओं पर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया है, उससे देश का गौरव बढ़ा है। मेवाणी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी और समूचा विपक्ष भारत की सेना के साथ है और उनके साहस को सलाम करता है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री को अपनी विफलताओं की जिम्मेदारी लेनी होगी।
गौरतलब है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे। इसके बाद भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शुरुआत की थी। इस अभियान के दौरान पाकिस्तान की ओर से सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य ठिकानों और आम जनता को निशाना बनाया गया, जिसका भारतीय सेना ने प्रभावी जवाब दिया।
मेवाणी के बयान ने न केवल राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है, बल्कि भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक रणनीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की बात करती है, वहीं विपक्ष इसे महज दिखावा बताता है और सरकार की रणनीति को विफल मानता है। अब देखना यह है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या ठोस कदम उठाती है और अमेरिका की भूमिका पर क्या सफाई देती है।
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