नीतीश कुमार की राजनीति में यू-टर्न! तेजस्वी की 'माई-बहन मान योजना' की राह पर चली सरकार!
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**नीतीश कुमार की राजनीति में नया मोड़, तेजस्वी की 'माई-बहन मान योजना' की राह पर बढ़ी सरकार!**
बिहार की राजनीति हमेशा से ही उठापटक और नए समीकरणों के लिए जानी जाती रही है। कभी अपने फैसलों और योजनाओं के जरिए दूसरे राज्यों के लिए मिसाल बन चुके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब विपक्ष की घोषणाओं का अनुसरण करते नजर आ रहे हैं। हाल ही में बिहार सरकार के गन्ना उद्योग मंत्री कृष्णनंदन पासवान के एक बयान ने इस बात की ओर इशारा कर दिया कि अब नीतीश कुमार की अगली योजना विपक्षी नेता तेजस्वी यादव की 'माई-बहन मान योजना' से प्रेरित हो सकती है।
मंत्री कृष्णनंदन पासवान ने एक जनसभा में खुलासा करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महिलाओं के लिए एक बड़ी योजना लाने की तैयारी में हैं, जिसमें महिलाओं को हर महीने 2500 रुपए देने की योजना प्रस्तावित है। इसके साथ ही वृद्धा पेंशन और विधवा पेंशन की राशि को भी बढ़ाकर 1500 रुपए करने पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। खास बात यह है कि यह घोषणा विपक्षी नेता तेजस्वी यादव की 'माई-बहन मान योजना' का सीधा जवाब मानी जा रही है।
मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। सवाल उठने लगे हैं कि जिस नीतीश कुमार की योजनाओं को पहले पूरा देश अपनाया करता था, आज वे खुद विपक्ष की राह पर क्यों चल रहे हैं? कभी जीविका दीदी योजना को लेकर नीतीश कुमार ने गर्व के साथ बताया था कि देश के कई राज्यों ने उनकी योजनाओं को फॉलो किया, लेकिन अब बदले हुए हालात में उनकी सरकार विपक्ष की नीतियों और घोषणाओं के जवाब में योजनाएं बना रही है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार पर विपक्ष की घोषणाओं का फॉलोअप करने का आरोप लगा हो। इससे पहले भी रोजगार और सरकारी भर्तियों के मुद्दे पर विपक्षी दबाव के बाद सरकार ने तेज़ी से फैसले लिए थे। चाहे वह दो लाख से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती हो या स्वास्थ्य विभाग में बड़े स्तर पर नियुक्तियों की घोषणा, नीतीश सरकार ने हर बार विपक्ष की रणनीति को काउंटर करने की कोशिश की है।
अब बिहार की राजनीति में यह सवाल अहम बनता जा रहा है कि यह सब लोकलुभावनी योजनाओं की दौड़ है या जनता को असल में लाभ पहुंचाने की मंशा? क्योंकि चुनावों के करीब आते-आते नेताओं द्वारा ऐसी घोषणाएं करना कोई नई बात नहीं है। ऐसा पहले भी कई राज्यों में देखा गया है, जैसे मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और झारखंड में, जहां सत्ता में बने रहने के लिए फ्रीबी योजनाएं और वादों का सहारा लिया गया।
बिहार में भी अब इस रणनीति के संकेत साफ नजर आ रहे हैं। तेजस्वी यादव की 'माई-बहन मान योजना' के असर को कम करने के लिए सरकार महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की तैयारी में है। इस योजना के जरिए नीतीश कुमार ना सिर्फ विपक्ष की रणनीति को मात देना चाहते हैं बल्कि महिलाओं के वोट बैंक पर सीधा असर डालने का भी इरादा रखते हैं।
फिलहाल बिहार की राजनीति में जो माहौल बनता नजर आ रहा है वो यह साबित करता है कि अगला विधानसभा चुनाव पूरी तरह से योजनाओं, वादों और घोषणाओं की जंग में तब्दील होने वाला है। अब देखना ये दिलचस्प होगा कि जनता इस योजना पर कितना भरोसा जताती है और क्या नीतीश कुमार का यह फॉलोअप प्लान उन्हें दोबारा सियासी फायदे की तरफ ले जाएगा या फिर ये विपक्ष के हाथों से पहले ही हथियार छीनने की कोशिश मात्र बनकर रह जाएगा।
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