एक और प्राचीन विश्वविद्यालय को जीवंत करने की तैयारी ?...
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बिहार को जल्द ही शिक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि मिलने वाली है। नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार के बाद अब प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय को भी फिर से जीवंत करने की तैयारी जोरों पर है। भागलपुर जिले के कहलगांव स्थित इस प्राचीन विश्वविद्यालय के खंडहरों के पास एक नए और आधुनिक कैंपस का निर्माण किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरे होने के बाद बिहार को एक और केंद्रीय विश्वविद्यालय की सौगात मिलेगी, जिससे यहां के छात्रों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष पहल पर इस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। फिलहाल, नए विक्रमशिला विश्वविद्यालय के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इसका शैक्षणिक सत्र शुरू हो सकता है। इस सिलसिले में बिहार के मुख्य सचिव अमृतलाल मीणा ने हाल ही में प्रस्तावित विश्वविद्यालय स्थल का दौरा किया। दौरे के दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि वे यहां साइट का निरीक्षण करने आए थे और इस परियोजना को जल्द से जल्द मूर्त रूप देने की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि नए कैंपस तक सुगम पहुंच के लिए एक अप्रोच रोड का निर्माण भी किया जाएगा।
हालांकि, पहले ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने प्रस्तावित बिहार दौरे के दौरान विक्रमशिला विश्वविद्यालय की पुनर्स्थापना की आधारशिला रख सकते हैं। लेकिन जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण यह संभावना अब कम दिखाई दे रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का भी कहना है कि इस विश्वविद्यालय के लोकार्पण में अभी कुछ समय लग सकता है, लेकिन इसके शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के लिए किसी अस्थायी कैंपस का विकल्प भी देखा जा रहा है, ताकि छात्रों को जल्द से जल्द लाभ मिल सके।
इस पूरे प्रोजेक्ट की प्रगति पर भागलपुर के जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय के लिए 210 एकड़ भूमि चिह्नित कर ली गई है और जल्द ही इसे सरकार को सौंप दिया जाएगा। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी, निर्माण कार्य और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को तेज कर दिया जाएगा। इस ऐतिहासिक पुनरुद्धार के बाद विक्रमशिला विश्वविद्यालय न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश में उच्च शिक्षा और बौद्धिक समृद्धि का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।
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