बिहार में पोस्टर वार से गरमाई सियासत!
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**बिहार में पोस्टर वॉर से सियासी पारा चढ़ा, तेजस्वी बनाम नीतीश — किसका जादू चलेगा?**
बिहार की सियासत में एक बार फिर चुनावी माहौल बनने लगा है। विधानसभा चुनाव भले ही अभी दूर हो, लेकिन राजनीति के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इसका सबसे बड़ा सबूत है — दीवारों पर लगते पोस्टर। जी हां, बिहार में इन दिनों पोस्टर वॉर छिड़ चुका है। एक तरफ महागठबंधन है, जो तेजस्वी यादव को ‘भविष्य का नेता’ बताकर जनता का दिल जीतने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ एनडीए है, जो नीतीश कुमार के ‘विकास मॉडल’ और ‘अनुभव’ पर भरोसा जता रहा है।
महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को लेकर एक पोस्टर जारी किया है, जिसमें लिखा गया है — "उम्मीद की किरण हैं तेजस्वी, भरोसे का नाम हैं तेजस्वी। जैसे सूरज का पूरब से निकलना तय है, वैसे ही 2025 में तेजस्वी का सीएम बनना तय है।" इस पोस्टर से साफ जाहिर है कि राजद और महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव को ही बिहार का अगला मुख्यमंत्री मानकर मैदान में उतरने वाले हैं।
वहीं दूसरी ओर जेडीयू और एनडीए के खेमे में भी तैयारी जोरों पर है। जेडीयू समर्थकों ने एक पोस्टर जारी किया है, जिसमें लिखा है — "25 से 30 फिर से नीतीश।" यानी साफ संकेत है कि एनडीए का भरोसा एक बार फिर से नीतीश कुमार पर टिका हुआ है। खुद बीजेपी भी कई मंचों से ये साफ कर चुकी है कि 2025 में एनडीए का चेहरा नीतीश कुमार ही होंगे।
अब सवाल ये है कि क्या पोस्टरों में लिखी बड़ी-बड़ी बातें बिहार की जनता के मन को बदल पाएंगी? क्या इस पोस्टर वॉर से सियासी समीकरणों में कोई बड़ा फेरबदल होगा?
बिहार की राजनीति में पोस्टर वॉर नया नहीं है, लेकिन इस बार मुकाबला सीधा-सीधा दो चेहरों के बीच सिमटता दिख रहा है — एक ओर हैं तेजस्वी यादव, जो युवा जोश के साथ नए बिहार का सपना दिखा रहे हैं और दूसरी ओर हैं नीतीश कुमार, जो अनुभवी और स्थिर शासन का चेहरा हैं।
तेजस्वी यादव की छवि एक ऐसे नेता की बनाई जा रही है, जो बिहार को नए रास्ते पर ले जाएगा — विकास, रोजगार और बदलाव की दिशा में। वहीं नीतीश कुमार के समर्थक उनकी पुरानी उपलब्धियों और सुशासन के भरोसे पर टिके हुए हैं।
इस पोस्टर वॉर के पीछे असल में पब्लिक पर्सेप्शन की जंग छिड़ी हुई है। पोस्टर चाहे जितने भी रंग-बिरंगे और आकर्षक हों, लेकिन आखिर में फैसला जनता के वोट से ही होगा। बिहार की जनता के लिए सवाल सीधा है — अनुभव और स्थिरता चुनें या युवा जोश और नए वादे।
अब देखना दिलचस्प होगा कि ये पोस्टर वॉर सिर्फ दीवारों तक सीमित रहता है या चुनावी नतीजों में भी इसका असर दिखाई देता है। बिहार की सियासत में आने वाले दिनों में और भी तेज उठापटक देखने को मिल सकती है, और एक बात तो तय है कि इस बार की लड़ाई पोस्टर से लेकर पब्लिक के मन तक पूरी तैयारी से लड़ी जा रही है।
**निष्कर्ष में कहें तो** — बिहार की दीवारों पर चिपके पोस्टरों ने यह बता दिया है कि सियासी जंग अब शुरू हो चुकी है। सवाल सिर्फ इतना है कि 2025 में बिहार की गद्दी पर कौन बैठेगा — अनुभव का नाम नीतीश या उम्मीद की किरण तेजस्वी?
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