वक्फ बिल से सियासत में भूचाल:नीतीश और चिराग की मुश्किलें बढ़ीं, मुस्लिम नेताओं का इस्तीफा शुरू!

वक्फ बिल से सियासत में भूचाल:नीतीश और चिराग की मुश्किलें बढ़ीं, मुस्लिम नेताओं का इस्तीफा शुरू!


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**वक्फ संशोधन बिल को लेकर बिहार की सियासत में घमासान मच गया है।** जेडीयू और लोजपा (रामविलास) द्वारा इस बिल का समर्थन किए जाने के बाद अब इन पार्टियों में मुस्लिम नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया है, जिससे नीतीश कुमार और चिराग पासवान दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और ऐसे में अल्पसंख्यक वोटों पर असर पड़ना तय मान जा रहा है।  

जेडीयू के कई मुस्लिम नेताओं ने पार्टी से किनारा कर लिया है। पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव मोहम्मद शाहनवाज मलिक, महासचिव मोहम्मद तबरेज सिद्दीकी अलीग, भोजपुर से सदस्य मोहम्मद दिलशान राइन और पूर्वी चंपारण से चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रवक्ता कासिम अंसारी ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। वहीं, चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (रामविलास) में भी इस्तीफे की शुरुआत हो चुकी है। अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष अली आलम ने पार्टी छोड़ते हुए साफ कहा है कि यह बिल मुसलमानों के खिलाफ है और पार्टी का इसके समर्थन में खड़ा होना गलत है।

इस पूरे घटनाक्रम ने जेडीयू और एलजेपी दोनों को असहज स्थिति में ला दिया है। दोनों पार्टियों की ओर से सफाई दी जा रही है, लेकिन सियासी नुकसान की आहट दोनों खेमों में महसूस की जा रही है। जेडीयू की ओर से यह दावा जरूर किया जा रहा है कि इस्तीफा देने वाले नेता पार्टी की मुख्यधारा से जुड़े नहीं थे, लेकिन विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश में है।

इधर जेडीयू के कद्दावर नेता और एमएलसी गुलाम गौस ने वक्फ संशोधन बिल के विरोध में शनिवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। इसमें एमएलसी आफाक आलम, खालिद अनवर, कहकशां परवीन और अफजल अब्बास जैसे नेता भी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि ये नेता बिल के खिलाफ खुलकर पार्टी नेतृत्व को घेर सकते हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश कुमार और चिराग पासवान इस स्थिति को कैसे संभालते हैं, खासकर तब जब चुनावी मौसम दस्तक दे चुका है।

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