वक्फ संशोधन बिल पर हंगामा तेज?विपक्ष संपतियों को हड़पने का लगा रहे हैं आरोप ....
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लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पारित होने के साथ ही देशभर में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। बिहार भी इससे अछूता नहीं रहा, जहां सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड के अधीन तीन हजार से अधिक संपत्तियां हैं। इनमें से कई संपत्तियां विवादों में घिरी हुई हैं और इनसे जुड़े कानूनी मामले वक्फ ट्रिब्यूनल और पटना हाईकोर्ट में लंबित हैं। इस बीच, वक्फ संशोधन बिल को लेकर राज्य में विरोध के स्वर बुलंद हो गए हैं। खानकाह मुनौमिया, पटना सिटी और इमारत-ए-शरिया ने खुले तौर पर इस बिल का विरोध किया है, जिसे लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
बिहार सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद इरशादुल्लाह के अनुसार, प्रदेश में सुन्नी वक्फ स्टेट की संख्या 2900 से अधिक है, जिनमें से अकेले पटना में ही 300 से ज्यादा संपत्तियां हैं। इनमें से लगभग 250-300 संपत्तियों के मामले वक्फ ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट में लंबित हैं। वहीं, शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अफजल अब्बास के मुताबिक, प्रदेश में शिया वक्फ स्टेट की कुल 327 संपत्तियां हैं, जिनमें 117 संपत्तियां केवल पटना में स्थित हैं। इनमें भी 137 संपत्तियों से जुड़े मामले वक्फ ट्रिब्यूनल में और 37 मामले हाईकोर्ट में लंबित हैं।
वक्फ संशोधन बिल के विरोध में इमारत-ए-शरिया ने भी कड़ा रुख अपनाया है। इसके नायब नाजिम और डिप्टी काजी सनाउल होदा कासमी ने कहा कि जो भी पार्टियां इस बिल का समर्थन कर रही हैं, हम उनका विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि यह बिल वक्फ की संपत्तियों के खुर्द-बुर्द होने और सरकारी कामों में इनके इस्तेमाल की आशंका को बढ़ा सकता है। इसी आशंका के चलते इमारत-ए-शरिया ने इस बिल के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया और इसे वापस लेने की मांग की।
बिहार में वक्फ संपत्तियों को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है। कई मामलों में अवैध कब्जे और प्रशासनिक हस्तक्षेप के आरोप लगते रहे हैं। सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड की संपत्तियों से जुड़ी कई कानूनी लड़ाइयां वर्षों से चल रही हैं, और यह बिल पारित होने के बाद इन विवादों के और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
बिल के समर्थन और विरोध को लेकर सियासी हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण स्थापित करने की साजिश बता रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि यह वक्फ संपत्तियों के पारदर्शी प्रबंधन के लिए जरूरी कदम है। बिहार के कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भी इस बिल के खिलाफ आवाज बुलंद की है और आने वाले दिनों में इसका विरोध और तेज होने की संभावना है।
इस मुद्दे को लेकर जनता में भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा के लिए जरूरी मान रहे हैं, तो कुछ इसे धार्मिक स्वतंत्रता में दखल मान रहे हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में बिहार और देशभर में इस बिल को लेकर क्या नया मोड़ आता है। फिलहाल, विरोध प्रदर्शन और कानूनी लड़ाइयों के बीच वक्फ संपत्तियों पर छिड़ी यह बहस जल्द थमती नहीं दिख रही।
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