पाकिस्तान के नेता की गीदड़भभकी: 'भारत में घुसकर दारुल उलूम देवबंद में चाय-नाश्ता करेंगे'

पाकिस्तान के नेता की गीदड़भभकी: 'भारत में घुसकर दारुल उलूम देवबंद में चाय-नाश्ता करेंगे'


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पाकिस्तान के नेता की गीदड़भभकी: 'भारत में घुसकर दारुल उलूम देवबंद में चाय-नाश्ता करेंगे'

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकवादी हमले ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को फिर से चरम पर पहुंचा दिया है। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया। भारत सरकार ने इस हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं, जिनमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना, पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजना और पाकिस्तानी उच्चायोग में कर्मचारियों की संख्या घटाने जैसे फैसले शामिल हैं।

हालांकि, भारत की सख्ती के बावजूद पाकिस्तान की तरफ से उकसाने वाली बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही। हाल ही में पाकिस्तान की जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी के नेता मौलाना राशिद महमूद सूमरो ने एक बेहद आपत्तिजनक और उग्र बयान दिया है। सूमरो ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान की सेना के साथ मिलकर वे भारत के अंदर घुसेंगे और दारुल उलूम देवबंद में चाय-नाश्ता करेंगे। इस तरह का बयान न सिर्फ पाकिस्तान की बौखलाहट को दर्शाता है बल्कि उसकी अपरिपक्व सोच को भी उजागर करता है।


मौलाना राशिद महमूद सूमरो ने अपने भाषण में यह भी कहा कि पाकिस्तान अकेला नहीं है और जरूरत पड़ने पर वे भारत से लड़ने और पाकिस्तान की रक्षा के लिए अपनी जान देने को तैयार हैं। इस गीदड़भभकी से स्पष्ट है कि पाकिस्तान के कुछ नेता अब भी भारत के खिलाफ नफरत फैलाने से बाज नहीं आ रहे हैं।


वहीं, दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी एक बयान दिया है जिसमें उन्होंने पहलगाम हमले की किसी भी 'निष्पक्ष और पारदर्शी' जांच में सहयोग देने की बात कही है। काकुल में पाकिस्तान मिलिट्री अकादमी की पासिंग-आउट परेड को संबोधित करते हुए शरीफ ने कहा कि भारत बिना किसी सबूत के पाकिस्तान पर आरोप लगा रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के हर रूप की आलोचना करता है और खुद भी आतंकवाद का शिकार रहा है।


शहबाज शरीफ का बयान जहां एक ओर संतुलन साधने की कोशिश लगती है, वहीं दूसरी तरफ मौलाना राशिद महमूद सूमरो जैसे नेताओं के उकसाऊ बयानों से पाकिस्तान की असल नीयत सामने आ जाती है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर दुनिया के सामने पाकिस्तान के दोहरे रवैये को उजागर कर दिया है—एक तरफ आतंकवाद के खिलाफ सहयोग की बात और दूसरी तरफ भारत के खिलाफ धमकी भरी बयानबाजी।


भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। सरकार के ताजा कदम इस बात का संकेत हैं कि भारत अब पाकिस्तान की नापाक हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें भी अब पाकिस्तान पर टिकी हैं, क्योंकि बार-बार की घटनाएं यह साबित करती हैं कि सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है।


दारुल उलूम देवबंद, जो भारत का एक प्रमुख इस्लामिक शिक्षण संस्थान है, उसे लेकर पाकिस्तान के नेता की इस तरह की टिप्पणी बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय है। इससे स्पष्ट है कि पाकिस्तान का एक वर्ग अब भी भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की ख्वाहिश रखता है, जिसे भारत कभी स्वीकार नहीं करेगा।


आखिरकार, भारत अपने मजबूत इरादों और एकजुटता से हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। देशवासियों को भी सतर्क रहना चाहिए और किसी भी भड़काऊ बयानबाजी का जवाब संयम और दृढ़ता से देना चाहिए। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत की एकता और अखंडता के खिलाफ साजिशें करने वालों को करारा जवाब मिलेगा।

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