एक बार फिर बिहार की सियासत में Lalu Yadav को भारत रत्न देने की मांग ?....

एक बार फिर बिहार की सियासत में Lalu Yadav को भारत रत्न देने की मांग ?....


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बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। इस बार मामला राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के कद्दावर नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को भारत रत्न देने की मांग से जुड़ा है। आरजेडी के महुआ से विधायक मुकेश कुमार रौशन ने विधानसभा में गैर सरकारी संकल्प पेश कर लालू यादव के लिए भारत रत्न की सिफारिश करने की मांग रखी। लेकिन सदन ने इसे ध्वनि मत से खारिज कर दिया। इस घटनाक्रम ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है, क्योंकि मुकेश रौशन की सीट पर तेज प्रताप यादव की नजर है और इसे लेकर पहले से ही सियासी घमासान जारी है।  

विधानसभा सत्र के दौरान जैसे ही मुकेश रौशन ने प्रस्ताव पेश किया, सदन में हंगामा मच गया। विपक्षी दलों ने इस मांग को लेकर तंज कसे, तो वहीं सत्तापक्ष ने इसे चुनावी स्टंट करार दिया। विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने कहा कि हर विधायक को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन सदन की राय भी मायने रखती है। इसके बाद प्रभारी मंत्री विजय कुमार चौधरी ने इस प्रस्ताव को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारत रत्न और अन्य पद्म पुरस्कारों के लिए हर साल नामों की सिफारिश की जाती है, और इसकी प्रक्रिया सितंबर महीने में शुरू होती है। फिलहाल सरकार की ओर से लालू यादव के नाम की सिफारिश करने का कोई विचार नहीं है।  

मंत्री विजय चौधरी ने मुकेश रौशन से यह प्रस्ताव वापस लेने का आग्रह किया, लेकिन जब उन्होंने इससे इनकार कर दिया, तो इसे ध्वनि मत से अस्वीकार कर दिया गया। लेकिन विधानसभा में इस प्रस्ताव को लेकर जो सियासी सरगर्मी देखी गई, वह यह संकेत देती है कि चुनावी माहौल में आरजेडी के भीतर भी कुछ खिचड़ी पक रही है। महुआ सीट पर जिस तरह से मुकेश रौशन और तेज प्रताप यादव आमने-सामने हैं, यह प्रस्ताव कहीं न कहीं उनके बीच सियासी रस्साकशी का संकेत भी देता है।  


महुआ विधानसभा सीट पिछले कुछ समय से बिहार की सबसे चर्चित सीटों में से एक बनी हुई है। 2015 में यहां से लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव विधायक बने थे। लेकिन 2020 के चुनाव में आरजेडी ने उन्हें समस्तीपुर की हसनपुर सीट से उतारा और महुआ से मुकेश रौशन को टिकट दिया। अब जब तेज प्रताप फिर से महुआ लौटने की तैयारी में हैं, तो सियासी समीकरण बदलते दिख रहे हैं। मुकेश रौशन के इस प्रस्ताव को तेज प्रताप के खिलाफ अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।  

बिहार की राजनीति में लालू यादव एक बड़ा नाम हैं, जिनकी पकड़ अब भी प्रदेश के बड़े वोट बैंक पर बनी हुई है। ऐसे में विधानसभा में उनके लिए भारत रत्न की मांग करना सिर्फ एक सामान्य प्रस्ताव नहीं था, बल्कि इसके पीछे कई सियासी गणित छिपे थे। महुआ की राजनीति में जहां तेज प्रताप यादव की वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हैं, वहीं मुकेश रौशन भी अपनी सीट बचाने की हर संभव कोशिश में लगे हैं। ऐसे में यह प्रस्ताव कहीं न कहीं उनके चुनावी भविष्य को सुरक्षित करने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा सकता है।  

अब सवाल यह है कि क्या महुआ में आरजेडी की लड़ाई तेज होगी? क्या लालू यादव के नाम पर सियासत सिर्फ विधानसभा तक ही सीमित रहेगी, या फिर यह आगामी चुनाव में भी एक बड़ा मुद्दा बनेगा? बिहार की राजनीति में जहां जातीय और पारिवारिक समीकरण अहम भूमिका निभाते हैं, वहीं इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी साफ कर दिया है कि महुआ सीट आरजेडी के लिए सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि सियासी शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा बनने जा रही है। चुनावी मौसम नजदीक आते ही इस मुद्दे पर और भी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है, लेकिन इतना तय है कि लालू यादव को भारत रत्न देने की मांग भले ही सदन में खारिज हो गई हो, मगर सियासी हलकों में इसकी गूंज अभी लंबे समय तक सुनाई देगी।

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