चुनाव से पहले बीजेपी का बड़ा दांव!नाराज विधायकों को मनाने के लिए दिया राज्य मंत्री का दर्जा!
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## **चुनाव से पहले बीजेपी का बड़ा दांव! नाराज विधायकों को मनाने के लिए दिया राज्य मंत्री का दर्जा, सियासी हलचल तेज**
बिहार की राजनीति में चुनावी हलचल बढ़ने लगी है और बीजेपी ने असंतुष्ट नेताओं को साधने के लिए बड़ा कदम उठा लिया है। मंत्रिमंडल विस्तार में अनदेखी से नाराज चल रहे दो बीजेपी विधायकों, बिहपुर के इंजीनियर शैलेंद्र और खजौली के अरुण शंकर, को पार्टी ने राज्य मंत्री का दर्जा देकर मना लिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और बीजेपी किसी भी तरह की बगावत या असंतोष से बचना चाहती है।
### **बीजेपी ने क्यों लिया यह फैसला?**
पिछले दिनों हुए मंत्रिमंडल विस्तार में बीजेपी के कुछ विधायकों को मंत्री पद मिलने की उम्मीद थी, लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ, तो नाराजगी खुलकर सामने आ गई। खासतौर पर भागलपुर क्षेत्र में बीजेपी का कोई भी मंत्री नहीं था, जिससे वहां के विधायक इंजीनियर शैलेंद्र की उम्मीदें बढ़ गई थीं। इसी तरह, अरुण शंकर भी खुद को कैबिनेट में शामिल किए जाने के योग्य मानते थे। लेकिन जब दोनों को दरकिनार कर दिया गया, तो उन्होंने पार्टी फोरम पर अपनी नाखुशी जाहिर कर दी।
बीजेपी के लिए यह असंतोष खतरे की घंटी था। विधानसभा चुनाव से पहले किसी भी तरह की अंदरूनी कलह पार्टी के लिए भारी पड़ सकती थी। विपक्ष पहले ही एनडीए के अंदर की खींचतान को बड़ा मुद्दा बना रहा है। ऐसे में बीजेपी ने तेजी दिखाते हुए दोनों विधायकों को मनाने का काम किया और उन्हें बिहार विधानसभा में पार्टी का सचेतक बना दिया, जिससे उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा भी मिल गया।
### **विधायकों की नाराजगी का क्या था कारण?**
इंजीनियर शैलेंद्र और अरुण शंकर दोनों ही लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। इनकी साफ-सुथरी छवि और क्षेत्र में मजबूत पकड़ के चलते यह उम्मीद की जा रही थी कि पार्टी इन्हें मंत्रिमंडल में जगह देगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिससे असंतोष बढ़ गया।
विशेषकर भागलपुर क्षेत्र से कोई भी मंत्री नहीं बनाए जाने पर सवाल उठे। भागलपुर बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है और यहां से किसी को मंत्रिमंडल में शामिल न करना पार्टी के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता था। इसी तरह, अरुण शंकर भी अपने क्षेत्र की उपेक्षा को लेकर नाराज थे।
### **क्या बीजेपी का यह दांव सफल होगा?**
बीजेपी ने अपनी ओर से डैमेज कंट्रोल करने की पूरी कोशिश की है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह दांव पूरी तरह से सफल होगा? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह एक तात्कालिक समाधान है, लेकिन अगर भविष्य में इन विधायकों को उचित महत्व नहीं दिया गया, तो यह असंतोष फिर से उभर सकता है।
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