लालू के इफ्तार में कांग्रेस के बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी से बढ़ी सियासी हलचल!
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### **महागठबंधन में पड़ी दरार? लालू के इफ्तार में कांग्रेस के बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी से बढ़ी सियासी हलचल!**
बिहार की राजनीति में इफ्तार पार्टी सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं होती, बल्कि यह सियासी समीकरणों को साधने का बड़ा मंच भी होती है। हर साल लालू यादव के दावत-ए-इफ्तार में महागठबंधन के सभी दलों के नेता शरीक होते हैं, लेकिन इस बार कांग्रेस के बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार और बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावारू इस इफ्तार में शामिल नहीं हुए, जिससे महागठबंधन में दरार की अटकलें तेज हो गई हैं।
### **बिना कांग्रेस के अधूरी रही लालू की इफ्तार पार्टी?**
लालू यादव ने अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी के सरकारी आवास पर यह इफ्तार पार्टी रखी थी। इस दौरान राजद के नेता, कई विपक्षी दलों के लोग और यहां तक कि एनडीए छोड़ने की कोशिश में लगे लोजपा (रामविलास) प्रमुख पशुपति कुमार पारस भी नजर आए। लेकिन कांग्रेस के बड़े नेता गायब रहे। हालांकि, कांग्रेस विधायक प्रतिमा दास, विजेंद्र चौधरी और एजाउल हक इस आयोजन में पहुंचे, लेकिन प्रदेश नेतृत्व का न आना अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा करता है।
### **कांग्रेस का रवैया, महागठबंधन में बढ़ती खटास?**
जब कांग्रेस विधायक प्रतिमा दास से इस मुद्दे पर सवाल किया गया, तो उन्होंने ‘नो कमेंट्स’ कहकर मामले को टाल दिया। यह प्रतिक्रिया संदेह को और गहरा कर रही है कि कांग्रेस और राजद के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। पिछले दिनों बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावारू ने बयान दिया था कि कांग्रेस किसी की ‘बी टीम’ नहीं है, बल्कि जनता की ‘ए टीम’ बनकर चुनाव लड़ेगी। ऐसे में कांग्रेस के इस कदम को गठबंधन से दूरी बनाने की शुरुआत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
### **मुकेश सहनी भी रहे नदारद, क्या VIP पार्टी भी महागठबंधन से दूर?**
इस इफ्तार पार्टी से सिर्फ कांग्रेस के नेता ही गायब नहीं थे, बल्कि वीआईपी पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी भी इसमें शामिल नहीं हुए। इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि बिहार की राजनीति में बड़े उलटफेर हो सकते हैं। महागठबंधन में दरार की यह अटकलें तब और मजबूत हो जाती हैं जब देखा जाता है कि पशुपति कुमार पारस, जो अभी एनडीए से पूरी तरह बाहर नहीं हुए हैं, वे इस आयोजन में मौजूद थे।
### **क्या महागठबंधन में फूट पड़ने वाली है?**
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी एक बड़ा संकेत हो सकता है कि गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। कांग्रेस पहले से ही बिहार में अपने लिए ज्यादा सीटों की मांग कर रही है और उसे लग रहा है कि राजद उसे पर्याप्त अहमियत नहीं दे रहा। ऐसे में यह दूरी कहीं न कहीं आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है।
### **लालू की चुप्पी और राजद की अगली चाल**
फिलहाल, इस पूरे मामले पर राजद ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन लालू यादव की इफ्तार पार्टी में कांग्रेस के न आने को हल्के में नहीं लिया जा सकता। क्या राजद और कांग्रेस के रिश्ते अब पहले जैसे नहीं रहे? क्या आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कोई अलग राह अपनाने वाली है? यह देखना दिलचस्प होगा।
### **आगे क्या होगा?**
बिहार की राजनीति हमेशा से अप्रत्याशित रही है। महागठबंधन का यह तनाव क्या किसी बड़े राजनीतिक भूचाल की ओर इशारा कर रहा है, यह तो आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन इतना तय है कि कांग्रेस की गैरमौजूदगी ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। क्या महागठबंधन एकजुट रहेगा, या यह दरार और गहरी होगी? जवाब जल्द ही सामने आएगा।
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