बिहार चुनाव 2025: NDA में सीट शेयरिंग को लेकर घमासान,

बिहार चुनाव 2025: NDA में सीट शेयरिंग को लेकर घमासान,


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**बिहार चुनाव 2025: NDA में सीट शेयरिंग पर घमासान, क्या पांडवों के बीच छिड़ेगी महाभारत?**


बिहार की सियासी जमीन एक बार फिर गर्म है। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे गठबंधनों के भीतर सीटों की बंटवारे की राजनीति भी तेज होती जा रही है। इस बार सबसे दिलचस्प लड़ाई NDA यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर देखने को मिल रही है। सवाल बड़ा है — क्या सीटों के इस गणित में NDA के सहयोगी दल आपस में ही आमने-सामने आ जाएंगे? क्या पांडवों के बीच महाभारत छिड़ जाएगी?


दरअसल, इस बार के चुनाव में एलजेपी (पासवान) यानी चिराग पासवान की पार्टी NDA का हिस्सा है। पिछले चुनाव में एलजेपी ने अलग राह पकड़ी थी और अकेले 134 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि जीत सिर्फ एक ही सीट पर मिली थी, लेकिन उसके उम्मीदवारों ने जेडीयू को भारी नुकसान पहुंचाया था। इस बार एलजेपी फिर NDA में लौट आई है और कम से कम 40 सीटों पर दावा ठोक रही है। अब यही बात बीजेपी और जेडीयू के लिए सबसे बड़ी परेशानी का सबब बन गई है। 


बीजेपी के नेता साफ कह रहे हैं कि वो इस बार भी कम से कम 100 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। जबकि पिछले चुनाव में बीजेपी ने 110 सीटों पर दांव लगाया था और 74 पर जीत हासिल की थी। वहीं, जेडीयू के खाते में पिछले चुनाव में 115 सीटें गई थीं, जिनमें से 43 पर जीत मिली थी। अब एलजेपी के आने और हम पार्टी के जीतन राम मांझी के सीटों पर बढ़ते दावों के बीच जेडीयू की सीटें सबसे ज्यादा कटने की आशंका है। मांझी की पार्टी 'हम' ने इस बार 25 से 35 सीटों की मांग कर दी है। जबकि हकीकत यह है कि पिछली बार 'हम' ने 7 सीटों पर लड़ाई लड़ी थी और 4 सीटें जीती थीं। 


इस बीच, एनडीए के भीतर एक और नया मोड़ तब आया जब मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी, जो पिछले चुनाव में एनडीए के साथ थी, अब महागठबंधन में शामिल हो गई है। हालांकि राजनीति के गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि सहनी फिर से NDA में वापसी कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो सीटों का समीकरण और भी उलझ जाएगा। सहनी की वापसी की चर्चाएं इसलिए भी तेज हैं क्योंकि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के एक बयान ने इस संभावना को हवा दे दी है, हालांकि मुकेश सहनी ने इसे सिरे से नकार दिया है।


चुनावी गणित का यह खेल बिहार में हमेशा दिलचस्प रहा है। जो दल कल तक एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोकते नजर आते थे, वही आज एक मंच पर साथ खड़े दिख रहे हैं। इस बार भी कुछ वैसा ही सियासी नजारा बिहार में दिख रहा है। एक तरफ एलजेपी, जेडीयू, बीजेपी और 'हम' के बीच सीटों को लेकर रस्साकशी चल रही है, वहीं दूसरी ओर महागठबंधन की ओर से भी अपनी रणनीति को मजबूत किया जा रहा है। 


साफ है कि इस बार बिहार चुनाव में सीटों का बंटवारा केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि दलों के अस्तित्व की लड़ाई है। हर पार्टी अपने-अपने हिस्से की सीटें बचाने के लिए सियासी चालें चल रही है। कहीं जेडीयू के खाते में सीटें कम होने का खतरा है तो कहीं बीजेपी और एलजेपी के बीच तालमेल मुश्किल हो सकता है। मांझी की सीटों की मांग भी बाकी दलों की नींद उड़ाए हुए है। 


अब देखना ये होगा कि NDA इस सीट शेयरिंग की पहेली को सुलझा पाता है या नहीं। क्योंकि सीटों का ये बंटवारा ही तय करेगा कि चुनावी रणभूमि में कौन मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरता है और कौन हाशिये पर चला जाता है। एक बात तो तय है कि बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में और भी सियासी उठापटक देखने को मिलेगी। NDA के पांडवों के बीच तालमेल कायम रहेगा या सीटों के लालच में सियासी महाभारत छिड़ेगी — इसका जवाब तो वक्त ही देगा।

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